बोले, अब रिन्यू नहीं करेंगे पास का पंजीकरण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के प्रतिबंधित सड़क मार्गों की परमिट फीस बढ़ाए जाने के सरकार के फैसले पर नगर निगम पार्षदों ने आपत्ति जताई है। नगर निगम सदन में मंगलवार को इस मुद्दे पर सभी पार्षद एकजुट दिखे और शुल्क बढ़ाने का विरोध किया। हालांकि, आम जनता की बजाय ज्यादातर पार्षदों में अपने परमिट की फीस की चिंता नजर आई।
पार्षदों ने कहा कि सरकार ने परमिट फीस कई गुना बढ़ा दी है। यह फीस उस सड़क की है जिसका रखरखाव नगर निगम करता है। इनकी सफाई तक निगम कर रहा है लेकिन निगम के पार्षदों और अधिकारियों से भी सरकार परमिट फीस वसूल रही है। पार्षदों ने कहा कि उनके परमिट छह महीने पहले खत्म हो गए हैं। वह तब तक इसे रिन्यू नहीं करेंगे जब तक सरकार शुल्क नहीं घटाएगी। कांग्रेस और भाजपा पार्षदों ने अधिवक्ताओं की तरह उन्हें भी शुल्क में राहत देने की मांग उठाई। सदन ने प्रस्ताव पारित किया कि नगर निगम की सड़कों पर जारी होने वाले परमिट की शक्तियां सरकार से मांगी जाएगी। इन सड़कों के परमिट नगर निगम ही जारी करे, सरकार से इसकी मंजूरी ली जाएगी। बैठक में कूड़ा शुल्क वसूली में बरती जा रही लापरवाही पर भी पार्षद सख्त दिखे।
पार्षद रामरत्न वर्मा, नरेंद्र ठाकुर, कमलेश मेहता, आशा शर्मा, निशा ठाकुर, विनीत शर्मा, मोनिका भारद्वाज, सरोज ठाकुर ने कहा कि उनके वार्ड में सैकड़ों लोग ऐसे हैं जिनकी गारबेज आईडी नहीं बने हैं। इनके घरों से कूड़ा तो उठता है लेकिन ये शुल्क नहीं देते। महापौर ने इस पर सभी सुपरवाइजरों को निर्देश दिए गए कि वे सभी लोगों को पंजीकृत करें। उन्हें बिल जारी करे। जिनके वार्ड में लापरवाही मिलेगी, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। पार्षद सरोज ठाकुर ने लक्कड़ बाजार क्षेत्र में शिफ्ट किए गए तहबाजारियों के दोबारा उसी जगह पर वापस आने पर आपत्ति जताई। कहा निगम इस पर कार्रवाई करे।