निरीक्षण के दौरान इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के साथ 121 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रायल रन किया था। इसमें ट्रैक, पुलों और अन्य संरचनाओं की मजबूती और सुरक्षा मानकों की जांच की गई। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद इस खंड को संचालन की अनुमति दी गई है। हालांकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस रूट पर ट्रेनों की अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा तय की गई है, जबकि टर्नआउट्स पर गति 15 किमी प्रति घंटा रहेगी। यह पूरा रेल खंड आधुनिक सुविधाओं से लैस और पूर्णतः विद्युतीकृत है। जिससे पर्यावरण के अनुकूल और तेज रेल संचालन सुनिश्चित होगा। डीआरएम अंबाला विनोद भाटिया ने बताया कि रूट लर्निंग की प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी, जिसके बाद इस खंड पर नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
सुरक्षा के इंतजाम कड़े
सीआरएस ने मंजूरी के साथ कुछ अहम शर्तें भी लागू की हैं। निर्देश दिए गए हैं कि इस रूट पर चलने वाली पहली यात्री ट्रेन के साथ विभागीय सहायक अभियंता (एईएन) मौजूद रहेंगे। इसके अलावा शुरुआती तीन दिनों तक विभिन्न विभागों के पर्यवेक्षक मौके पर तैनात रहकर सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी निगरानी रखेंगे। वायाडक्ट (पुल) से जुड़े सभी सुरक्षा कार्य 30 जून तक हर हाल में पूरे करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
माल ढुलाई और विकास को मिलेगा बढ़ावा
दौलतपुर-करटोली रेल खंड 122.57 किलोमीटर लंबी नंगल डैम–तलवाड़ा–मुकेरियां रेल परियोजना का अहम हिस्सा है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल यात्रियों को बेहतर और तेज सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग और व्यापार के लिए माल ढुलाई भी आसान और सस्ती होगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस नई रेललाइन के शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को नई गति मिलेगी और लोगों की आवाजाही पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी।