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नकल पर बनाया यूएमसी केस, अभ्यर्थी का पेपर रद्द

Tue, 06 Nov 2018 06:00 AM IST
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
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प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने परीक्षा में नकल करवाने के मामले में सख्त रुख अपना लिया है। सब डिवीजनल कोऑर्डिनेटर ने लिपिक भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में यूएमसी केस बनाकर अभ्यर्थी का पेपर रद्द कर दिया है। आयोग ने उपमंडलीय परीक्षा समन्वयक एवं एसडीएम हमीरपुर से भी रिपोर्ट मांगी है।

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जांच रिपोर्ट में आरोप सही निकले तो परीक्षा केंद्र अधीक्षक पर भी कार्रवाई तय है। प्रारंभिक जांच में आयोग ने पाया है कि अभ्यर्थी ने परीक्षा खत्म होने से पूर्व ही ओएमआर शीट से कार्बन कॉपी को काटकर अलग कर लिया था।

अमर उजाला ने 5 नवंबर के अंक में मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इसके बाद आयोग ने मामले को आगामी बैठक में लाने की तैयारी कर ली है। यहां आयोग के सभी सदस्य इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।
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आयोग यह भी छानबीन कर रहा है कि परीक्षा केंद्र अधीक्षक और अभ्यर्थी में क्या रिश्ता है और सीसीटीवी परीक्षा के दौरान कार्य कर रहे थे या नहीं। कर्मचारी चयन आयोग ने रविवार को पोस्ट कोड 692 के तहत लिपिक के 156 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा ली। इसके लिए प्रदेश में 257 परीक्षा केंद्र बनाए थे।

नकल का मामला काफी गंभीर : शर्मा

हमीरपुर के निजी कॉलेज में परीक्षा हाल में केंद्र अधीक्षक की ओर से एक अभ्यर्थी को नकल करवाने का आरोप है। इस पर अन्य अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्र अधीक्षक का घेराव कर दिया। मामला शांत करवाने को पुलिस बुलानी पड़ी। 

प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन ब्रिगेडियर सतीश कुमार शर्मा परीक्षा में नकल करवाने का यह काफी गंभीर मामला है। इसे आयोग की बैठक में लाया जाएगा। परीक्षा में नकल किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं होगी।

एसडीएम से जांच रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद बैठक में आगामी कार्रवाई से संबंधित निर्णय लिया जाएगा। वहीं एसडीएम शिल्पी बेक्टा का कहना है कि नकल पर यूएमसी केस बनाया था। अभ्यर्थी का पेपर रद्द कर दिया गया है।
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पूर्व में चपरासी को लगाया था पर्यवेक्षक

इससे पहले हमीरपुर के एक सरकारी स्कूल में इंजीनियरिंग की परीक्षा के दौरान एक चपरासी को पर्यवेक्षक लगाया था। मामला सामने आने पर आयोग ने जांच के बाद आरोपों को सही पाया था।

कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में लिपिक भर्ती के दौरान एक परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थी के पिता को केंद्र अधीक्षक लगा दिया था। यह परीक्षा स्कूल शिक्षा बोर्ड ने ली थी। शिक्षा बोर्ड और बैंक प्रबंधन ने जांच के बाद सख्त कार्रवाई की बात की थी, लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
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