उन्हें केवल एडवाइजरी भेजी जा रही है कि जहां हैं, वहीं रहो, लेकिन बंकर में वैसे ही भूखे-प्यासे मर जाएंगे। अब स्थिति बेहद भयावह हो गई है। अंकुर ने बताया कि खारकीव में करीब 5000 भारतीय छात्र हैं। उसने और उसके साथी छात्रों ने भारत सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें जल्द यहां से निकालने का इंतजाम किया जाए।
परिजनों का आरोप केंद्र और राज्य सरकार नहीं कर रही सहयोग
अंकुर चंदेल के पिता नरेश चंदेल ने बताया खारकीव में एक छात्र की मौत होने से वह भी बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, लेकिन न केंद्र और न राज्य सरकार कोई सहयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के नंबर पर व्हाट्सएप मैसेज और कई बार कॉल किए, लेकिन न तो उनका मैसेज पढ़ा गया है और न फोन सुना।
वह बुधवार को मंडी शिवरात्रि मेले के उद्घाटन पर पहुंच रहे मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें अपनी परेशानी बताएंगे। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी मंडी पहुंचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के मरने के बाद सांत्वना नहीं, उनको निकालने के लिए मदद चाहिए।