मौसम और ऊंचाई जैसे तकनीकी पहलुओं को देखते हुए शिमला से दिल्ली की फ्लाइट के लिए सिर्फ 15 पैसेंजर का लोड मंजूर किया गया, जबकि दिल्ली से शिमला के लिए आने वाली फ्लाइट में एक बार में 35 यात्रियों को बैठने की मंजूरी दी गई। खास बात यह थी कि पहले प्लेन की पचास फीसदी सीटों को सब्सिडी के तहत रखा गया।
इसके चलते शिमला से दिल्ली वाली सभी 15 सीटें दो हजार से कम की थीं, जबकि दिल्ली से आने वाली फ्लाइट की 24 सीटें सस्ती थीं। कुछ समय पहले कंपनी ने शिमला से दिल्ली की सस्ती सीटों को 15 से घटाकर 9 कर दिया।
यही नहीं, शिमला आने वाली दिल्ली की फ्लाइट को भी 17 कर दिया। इन सीटों के बाद बची सीटों का किराया फ्लोटिंग रेट से तय हो रहा है। हाल यह है कि 1900 रुपये वाली सीट वर्तमान में 19 हजार रुपये से भी ज्यादा के दाम में बिक रही है।
आरसीएस उड़ान योजना शुरू होने के एक साल में शिमला हवाई अड्डे पर दस हजार से ज्यादा यात्री सफर कर चुके हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों की मानें तो इस संख्या में आने वाले सालों में फ्लाइट शुरू होने के बाद और इजाफा हो सकता है।
वहीं, शिमला हवाई अड्डे पर आरसीएस उड़ान योजना की पहली सालगिरह को कर्मचारियों ने हवाई यात्री एवं एयरपोर्ट के सभी स्टाफ के साथ हर्षोल्लास से मनाया। इस दौरान आगमन और प्रस्थान कक्ष में हवाई यात्रियों में उपस्थित बच्चों द्वारा केक काटा गया। बाकायदा सभी हवाई यात्रियों और कर्मचारिओं केक बांटा गया।