हिमाचल प्रदेश के लाहौल-चंबा को जोड़ने वाला समुद्रतल से 16800 फीट ऊंचा कुगती पास आवाजाही के लिए बहाल हो गया है। मंगलवार को पहाड़ी व उबड़-खाबड़ रास्ते से होकर चंबा के भरमौर चौरासी मंदिर से आठ श्रद्धालुओं की टोली अपने इष्ट कुल देवता झोलिंग स्थित बुहारी देवता के दर्शन के लिए लाहौल पहुंचे हैं। यह रास्ता करीब आठ माह बाद आवाजाही के लिए बहाल हुआ है। इस दौरान इन श्रद्धालुओं को सात फीट बर्फ पर भी चलना पड़ा है।
यह श्रद्धालु महज दो दिन का सफर कर लाहौल पहुंच गए हैं। जबकि लाहौल से इसी रास्ते मणिमहेश झील की ओर निकलने वाले श्रद्धालु तीन दिन के रात्रि ठहराव के बाद चौथे दिन मणिमहेश डल झील पहुंचते हैं। बीते वर्ष कोरोना के चलते यह रुट श्रद्धालुओं, ट्रैकरों के लिए सूना पड़ गया था, मगर इस बार आवाजाही शुरू हो गई है। इस रूट से चंबा के भेड़ पालक भी लाहौल की पहाड़ियों में तकरीबन तीन माह तक चारागाह को आते हैं। यहां से रास्ता खुलने के बाद लाहौल, मनाली व कुल्लू से काफी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश झील की ओर निकलते हैं।
मंगलवार को कुगती पास जोत लांघकर भरमौर से लाहौल पहुंचे चंबा जिला के भरमौर चौरासी मंदिर के श्रद्धालु गौरी शंकर शर्मा, शुभि पंडित, सोनू, अजय कुमार, अभिशेख, विशाल, बिट्टू और जोध राम ने बताया कि वह हर वर्ष दर्शन को आते हैं। वे सोमवार को भरमौर से चलकर एक रात्रि रेलिंग रुकने के बाद मंगलवार को लाहौल पहुंचे हैं। जोवरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोम देव योकी ने इस ओर से आवाजाही करने वाले लोगों से अपील की है कि अभी इस मार्ग के कई हिस्सों में बर्फ है। रास्ता मुश्किल भरा है और यहां बर्फ के हिमखंड गिरने का खतरा है।