अनीता ने गांव में जाकर इस घटना के बारे में लोगों को बताया। इसके बाद परिजन और ग्रामीण फौरन घटनास्थल की ओर रवाना हुए। यहां से उन्हें देर रात मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।
इससे पहले कि डॉक्टर उनका उपचार कर पाते, दोनों की मौत हो चुकी थी। दोनों के मरने की खबर सुनते ही अनीता की आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे हैं।
अनीता को पता है कि उसकी जिंदगी उन दोनों की बदौलत ही बची है। अगर वह चाहते तो खुद वहां से हट सकते थे। ऐसा करने से शायद उनकी जिंदगी भी बच जाती। मगर इसमें उनकी दोस्त की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
उन्होंने अपनी जिंदगी की परवाह न करते हुए दोस्त को धक्का मारकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और खुद दोनों मौत के आगोश में चले गए। उनकी दोस्ती की हर कोई मिसाल दे रहा है।