फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गहरे नाले में जा गिरी कार, हादसे में दो युवकों की मौत, एक घायल

Sun, 28 Jan 2018 10:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नेरवा
विज्ञापन
विज्ञापन

शामठा-टिकरी मार्ग पर कार हादसे में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। हादसा शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। 

विज्ञापन


जानकारी के अनुसार तीन युवक आल्टो कार में अपने किसी परिचित को टिकरी छोड़कर वापस नेरवा की ओर लौट रहे थे। सगरौठी से करीब एक किलोमीटर पहले कार करीब 80 मीटर नीचे सगरौठी नाले में जा गिरी।

दुर्घटना की जानकारी शनिवार सुबह मिली। घायल को नेरवा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद आईजीएमसी शिमला रेफर कर दिया गया है। इधर, नेरवा अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। 
विज्ञापन

 

घायल युवक ने खुद सड़क तक पहुंच कर दी हादसे की सूचना

सुबह दुर्घटना में घायल एक युवक किसी तरह नेरवा पांवटा मार्ग पर पहुंचा। वहां फेडिजपुल की तरफ से आ रहे एक वाहन में लिफ्ट लेकर अपने घर द्वाड़ा पहुंचा। घायल युवक के परिजनों ने शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे दुर्घटना की सूचना नेरवा थाने में दी। 

पुलिस दल जब तक दुर्घटना स्थल पर पहुंचा, तब तक गाड़ी चालक व एक अन्य युवक की मौत हो चुकी थी। मृतकों की पहचान बवेश (23) पुत्र स्वर्गीय सोहन सिंह गांव कयरला डाकघर केदी तहसील नेरवा और वीरेंद्र (20) वर्ष पुत्र नीम बहादुर, निवासी राणाक्यार डाकघर केदी के रूप में हुई ।

सुरेश (20) पुत्र राम सिंह निवासी द्वाड़ा, डाकघर केदी घायल हुआ है। नायब तहसीलदार नेरवा मोहि राम चौहान ने प्रशासन की तरफ से मृतकों के परिजनों को दस-दस हजार और घायल को पांच हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है। डीएसपी चौपाल संतोष शर्मा ने बताया कि दुर्घटना की जांच चल रही है। 
विज्ञापन

पहले पति खोया, अब एकमात्र सहारा बेटा भी नहीं रहा

नौ माह पहले दुर्घटना में पति खोया और अब सगरोठी में हुए कार हादसे में पिंकी का इकलौता बेटा छिन गया। नौ माह पूर्व गुम्मा बस हादसे में 19 अप्रैल को पिंकी के पति सोहन सिंह, पुत्री शकुंतला व नातिन दिव्या की मौत हो गई थी। अब हादसे ने पिंकी के मन में खौफ पैदा कर दिया था।

वह जब भी हादसे के बारे में सुनती थी तो बेसुध हो जाती थी। पिंकी का बेटा बवेश उसका एक मात्र सहारा बचा था। बवेश निजी गाड़ी चलाता था। हादसे से खौफजदा पिंकी अपने बेटे को चालक का कार्य छोड़ देने को कहती रहती। लेकिन वह अपनी मां की बात को नहीं मान रहा था।

पिंकी कभी भी बेटे के घर पहुंचने तक भोजन नहीं खाती थी। पिंकी इतनी बेसुध हो गई कि कार हादसे को सच नहीं मान रही है। उसको अभी विश्वास नहीं हो रहा कि उसका बेटी अब दुनिया में नहीं है।

घर में रिश्तेदारों व गांव के लोगों को देखकर पिंकी बार-बार पूछ रही कि उसका बेटा बवेश कब लौट रहा है। बेसुध माता को देखकर घर में पहुंच रहे हर व्यक्ति की आंखें नम हो रही हैं। युवा का अंतिम संस्कार शनिवार को उसके गांव में किया गया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें