प्रदेश में कामधेनु दीपावली मनाने के लिए इस वर्ष हिमाचल में गोबर के दो करोड़ दीये तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रदेश भर की 186 गोशालाओं में दीये बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षक तैनात कर दिए गए हैं। नालागढ़ की महादेव स्थित शिव शंकर गोशाला में पहला प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें प्रदेश भर से आए गो सेवकों को दीये बनाने की विधि बताई गई है।
ये सभी सेवक अपनी-अपनी गोशालाओं में जाकर दीये बनाएंगे। हिमाचल समेत इस वर्ष पूरे देश में कामधेनु दीपावली मनाई जाएगी। इसके लिए देश भर में गोबर के दीये जलाए जाएंगे। राष्ट्रीय कामधेनु गो सेवा आयोग के चेयरमैन डॉ. वल्लभ भाई कथीरिया ने प्रदेश के गो संचालकों को दो करोड़ दीये बनाने का लक्ष्य दिया है।
इसी के आधार पर महादेव गोशाला में इसके लिए पहला प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें सोलन, कांगड़ा, शिमला, ऊना के गो सेवकों ने हिस्सा लिया। गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अशोक शर्मा ने सभी गो संचालकों से कहा कि गोबर के दीये बनाने में बढ़चढ़कर हिस्सा लें। अगर सांचे या अन्य सामान की दिक्कत आती है तो वे संपर्क कर सकते हैं। यह सभी सामान बाजार में उपलब्ध है।
चावल का पाउडर, इमली के बीज और मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट होगा इस्तेमाल
नूरपुर स्थित स्वदेशी कामधेनु गोशाला के संचालक एवं प्रशिक्षक ऋषि डोगरा ने महादेव स्थित गोशाला में आए प्रदेश भर के गो सेवकों को बताया कि गोबर के पाउडर के साथ अन्य प्राकृतिक सामान जैसे चावल का पाउडर, इमली के बीज का पाउडर और मुल्तानी मिट्टी के पेस्ट से इसे तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक सांचा होता है। इसमें पेस्ट को डालने के बाद दीये तैयार हो जाते हैं।
दीपावली के बाद खाद का काम करेंगे दीये
ये दीये दीपावली पर तो काम आएंगे ही, बाद में इन दीयों को अपने गार्डन में डाल सकते हैं, जिससे वहां पर यह खाद का काम करेंगे। यही नहीं, अगर लोग गोबर के दीये जलाएंगे तो आत्म निर्भर भारत में गोशालाओं का एक बड़ा योगदान होगा।