इससे पानी का इस्तेमाल करने वाले लोगों को पीलिया जैसे जलजनित रोगों का शिकार होना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि इन नमूनों के फेल होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला के लिए पेयजल आपूर्ति करने वाली संस्था ग्रेटर शिमला वाटर सप्लाई एंड सीवरेज सर्कल (जीएसडब्ल्यूएसएससी) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की बात की है।
इसके लिए सरकार से मुकदमे की मंजूरी मांगी है, मगर आईपीएच महकमा इनके बचाव में आ गया है। इन्हीं प्लांटोें से विभाग की ओर से लिए गए सैंपल पास हो गए थे, पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए नमूने फेल हुए हैं। राज्य सरकार के आईपीएच महकमे के एक अधिकारी ने बताया कि संयुक्त रूप से लिए गए नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उसी के बाद आगामी कार्रवाई की बात होगी।