कांग्रेस के शिमला ग्रामीण जिले के समानांतर अध्यक्ष की तैनाती का मामला पार्टी आलाकमान तक पहुंच सकता है। वीरभद्र समर्थक ये मामला हाईकमान से उठा सकते हैं। संभव है कि इस बारे में राहुल गांधी के सात अक्तूबर को प्रस्तावित हिमाचल दौरे के दौरान ही इस पर बात हो। मोदी हवा के तमाम शोर-शराबे के बीच चुनाव पर फोकस करने के बजाय प्रदेश कांग्रेस अंतर्कलह में ही फंसी है।
सरकार और संगठन के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सीएम वीरभद्र को चुनाव में जहां फ्री हैंड नहीं दिए जाने से उनके समर्थक पूरी तरह खुश नहीं हैं, वहीं प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू को अभयदान मिलने से उनके हितैषियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा विवाद सुक्खू के करीबी और नए जिला शिमला ग्रामीण अध्यक्ष की नियुक्ति से गहराया है।
वीरभद्र के करीबी जिला शिमला ग्रामीण अध्यक्ष यशवंत छाजटा की नियुक्ति हो चुकी हैं, मगर सुक्खू अपने करीबी कार्यकारी अध्यक्ष रितेश कपरेट को हटाने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कपरेट की अध्यक्ष के समानांतर नियुक्ति को जारी रखा है। वीरभद्र समर्थक चाहते हैं कि सरकार और संगठन की बागडोर सीएम के नियंत्रण में हो।
काफी वक्त तक वीरभद्र समर्थकों ने प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू को हटाने का अभियान भी चलाया, मगर ये मुहिम सिरे नहीं चढ़ी। सुक्खू की हाईकमान में पकड़ इसकी वजह मानी जा रही है। प्रदेश का वीरभद्र विरोधी खेमा भी अंदरखाते सुक्खू को न हटाने के पक्ष में खड़ा है। दरअसल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की टिकट तय करने वाली चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी में अहम भूमिका रहती है।
यही कारण है कि वीरभद्र खेमा प्रदेशाध्यक्ष को अपने अनुकूल करना चाहता रहा है। सुक्खू पूरी तरह से इस खेमे के लिए अनुकूल नहीं माने जाते हैं। यही सारे अंतर्कलह की जड़ मानी जा रही है। नतीजतन, पार्टी के तमाम नेता भाजपा का एकजुट होकर विरोध करने के बजाय आपसी झगडे़ में उलझे हैं। हाईकमान भी मामले में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर रहा।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव नरेश चौहान ने इस अंतर्कलह को लेकर सोमवार को पत्रकार वार्ता में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस एकजुट होकर भाजपा की गलत नीतियों का विरोध करेगी। उनकी मानें तो अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति में कुछ गलत नहीं है।