पशु बलि पर रोक के फैसले को सदियों पुराने देवी मां मंदिर धरेच की कमेटी ने भी समर्थन दे दिया है। जैईश्वरीय देवी मां के इस मंदिर में सदियों से हर वर्ष कई आयोजनों में बकरों की बलि दी जाती रही है लेकिन अब नारियल फोड़कर इस प्रथा को निभाया जाएगा।
मंदिर के भंडारी लच्छी राम ने बताया कि भूंडा, शांद व जागरा जैसे बडे़ कार्यक्रमों के अलावा सूतक-पातक के समय बलि की प्रथा आम है। भूंडा यज्ञ का आयोजन मंदिर परिसर में 12 वर्ष बाद होता है। पूरे क्षेत्र की जनता इस कार्यक्रम में एकत्रित होकर मंदिर आती है। देवी मां की पालकी को देवता के गूर आम जनता के बीच सुखद जीवन का आशीर्वाद देने के लिए लाते हैं।