बजट पर चर्चा के दौरान जब मंत्री बिक्रम सिंह जयराम सरकार की वाहवाही कर रहे थे तो इसी बीच उन्होंने पूर्व कांग्रेस सरकार पर भी तीखे तंज कसे और कहा कि पूर्व सरकार ने लोगोें को ठगा है।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उन्हें टोका और कहा कि वे असंसदीय भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और ये सही नहीं है। नियमों के दायरे में रहकर बात करें। साथ में मजाक के लहजे में ये भी कहा कि बिक्रम सिंह दिल के साफ हैं, मगर मुंहफट्ट हैं।
इसके बाद बिक्रम सिंह ने जब बीमार उद्योगों का मामला उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने कुछ लोगों को फायदा देने का प्रयास किया, जिससे सरकार पर 2600 करोड़ का राजस्व बोझ पड़ने वाला था, मगर
जयराम सरकार ने सत्ता मेें आते ही अपनी कैबिनेट में इस बारे में बनाई गई नीति को खारिज कर इस पर जांच बैठाई है। इस पर वीरभद्र बोले कि कैबिनेट में चर्चा के लिए कोई भी मामला जा सकता है।
ये मामला भी गया था। इसे ड्रॉप कर दिया गया। जबकि मंत्री इस बात पर अड़े रहे कि इस बारे में नीति को लागू कर दिया गया था। नेगेटिव लिस्ट में होने के बावजूद उद्योगों को फायदा दिया गया।
इस बीच उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि इसे कांग्रेस सरकार ने नहीं, भाजपा ने ही ड्राप किया है। इसी बीच दोनों ओर तीखी नोंकझोंक चलती रही। कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा - आप भी तो लोहे और स्टील के नेगेटिव लिस्ट में चल रहे उद्योगों को फायदा दे रहे हैं।
इस पर बिक्रम सिंह बोले - जिस व्यक्ति के कारण ये पालिसी बनी, हम उसे जानते हैं। इस पर वीरभद्र बोले - हिम्मत है तो इसे बाहर लाएं। इस पर बिक्रम सिंह बोले - आप डरा-डराकर मारते हैं। आप पिछले तीन-चार दिन में कभी नहीं उठे। अब मेरे पीछे पडे़। आपने धारा 118 मेें हजारों लोगों को हिमाचल में जमीनें बेचने की मंजूरी दी है।
बजट पर चर्चा के लिए मंत्री बिक्रम सिंह के खड़े होने पर कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने ये कहकर आपत्ति की कि उन्हें विधायक नहीं मंत्री के रूप मेें ही बोलने की अनुमति दी जाएगी।
उन्होंने ये मामला उस वक्त उठाया जब विक्रम सिंह आबकारी नीति पर कांग्रेस सरकार को आडे़ हाथों ले रहे थे। उन्होंने कहा कि मंत्री बजट चर्चा के बीच हस्तक्षेप करते हैं।
आबकारी पर संबंधित मंत्री को ही बोलना चाहिए। इस पर स्पीकर बिंदल ने कहा कि बिक्रम सिंह का नाम सत्तारूढ़ दल की ओर से विधायक के रूप में बोलने के लिए आया था, इसलिए वे चर्चा कर रहे हैं।
सुक्खू ने जब ये कहा कि पहले दिन ही एमएलए बनकर आए जेआर कटवाल पर एफआईआर दर्ज हो जाती है। उन्होंने एक सांसद के खिलाफ भी चार्जशीट आने की बात की।
इस पर झंडूता के विधायक जेआर कटवाल ने स्पष्टीकरण दिया कि इस बारे में हाईकोर्ट में संबंधित व्यक्ति की ओर से दायर याचिका खारिज हो चुकी है। इस पर एक लाख रुपये की कास्ट भी पड़ी है।
कटवाल ने आदेश की प्रति को भी सदन में दिखाया। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें न तो पुलिस ने पूछा है और न ही अदालत ने ही पूछा है। उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।
आला अफसर बाहर जाने लगे तो सुक्खू ने कसा तंज
आला अफसर सदन से बाहर जाने लगे तो नादौन से कांग्रेस के विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने तंज कसा - सरकार गंभीर नहीं है। चर्चा के दौरान सरकार के प्रमुख अधिकारी बैठे रहते तो अच्छा होता। इस बीच कृषि मंत्री, सिंचाई मंत्री किसी का न बैठना सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।