उन्होंने कहा कि त्वरित वन अग्निशमन बल में 1900 स्वयंसेवी बतौर सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा अभियान के दौरान लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए पैदल एवं साइकिल रैलियां, चैट शो, नुक्कड़ नाटकों, पेंटिंग व नारा लेखन तथा प्रदर्शनियां करवाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने अभियान की मुख्य विशेषताओं की नियमावली का भी विमोचन किया। विस अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी सहित कई विधायक, प्रधान मुख्य अरण्यपाल जीएस गोराया भी मौजूद रहे।
इससे पहले वन विभाग ने सुबह शिमला के रिज मैदान में दौड़ का आयोजन किया। इसमें विभिन्न स्कूलों, वन अधिकारियों तथा स्थानीय लोगों ने भाग लिया। वन मंत्री ने दौड़ को हरी झंडी दिखाई।
वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि जागरूकता अभियान 16 से 27 मार्च तक दो रूटों पर एक साथ चलाया जाएगा। इसमें पहला रूट कांगू, सुकेत, जयदेवी, जरी, पतलीकूहल, उरला, जोगिंद्रनगर, लडभड़ोल, बैजनाथ, द्रोह, गोपालपुर, चुवाड़ी, चंबा, डलहौजी, देहरा तक रहेगा।
दूसरा रूट निरमंड, रामपुर, सुन्नी, अर्की, अघर, बिजड, बंगाणा, अंब, रामशहर, नालागढ़, त्रिलोकपुर, कोलर, पांवटा, माजरा, कफोटा, नाहन, जामटा, धर्मपुर और सोलन तक रहेगा। अभियान के दौरान दोनों वाहन जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति को छोड़कर प्रदेश के सभी 11 जिलों में जागरूकता उत्पन्न करेंगे।
कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत केवल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ही अपने कार्यों की डीपीआर केंद्र को भेजता है। अन्य विभाग अपने कार्यों की वार्षिक कार्य योजना केंद्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजते हैं।
वास्तव में परियोजनाओं की डीपीआर केंद्र सरकार से धनराशि प्राप्त करने के बाद ही बनाई जाती है। मारकंडा ने यह जानकारी नगरोटा के विधायक अरुण कुमार की ओर से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी।
उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग को वर्ष 2015-16 में 3.23 लाख, वर्ष 2016-17 में 13.50 लाख, कृषि के लिए वर्ष 2015-16 में शून्य जबकि 2016-17 में 285.46 लाख और ग्रामीण विकास 2015-16 वर्ष में 1166.62 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई है।