एशिया की 35 फीसदी दवाओं का निर्माण करने वाले बीबीएन औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को ट्रकों की हड़ताल से दो दिन में ही 400 करोड़ रुपये की चपत लग गई है। यदि यह हड़ताल का क्रम जारी रहा तो उद्योगों का उत्पादन भी ठप्प हो जाएगा।
वहीं, उद्योगों के उत्पादन से जुड़े कर्मचारी व कामगार भी बैठ जाएंगे, क्योंकि ट्रकों के न चलने से पहले ही लोड़िंग अनलोड़िंग की लेबर खाली बैठ चुकी है। प्रदेश की औद्योगिक राजधानी बीबीएन के करीब 2200 उद्योगों में सालाना 85 करोड़ का टर्नओवर होता है, इस लिहाज से प्रतिदिन
करीब 250 करोड़ का टर्नओवर होता है। इसमें से उद्योग यहां आपस में एक दूसरे को करीब 50 करोड़ का माल का आदान प्रदान करते है। करीब 200 करोड़ रुपये प्रतिदिन टर्नओवर के हिसाब से दो दिन में 400 करोड़ की उद्योगों को चपत लग चुकी है।
उद्योगों के पास इंवेंटरी न होने के कारण कच्चा माल भी एक दो दिन में समाप्त हो जाएगा, जिससे उत्पादन भी ठप्प हो सकता है, वहीं तैयार माल डिलीवर नहीं हो सकेगा, जिससे उद्योगों को कई प्रकार के संकट से जूझना पड़ेगा।
बिजली बिलों व जीएसटी भुगतान में झेलनी पड़ेगी दिक्कत उद्योगों को अपने बिजली बिलों के भुगतान और आवश्यक जीएसटी के भुगतान में दिक्कतें झेलनी होगी।
ट्रकों की देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन समेत विभिन्न ट्रक यूनियनों के तहत चलने वाले ट्रकों के पहिये थमे रहे। सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन के करीब 900 ट्रक देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं।
ट्रक यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय और राज्य कमेटी के आह्वान पर हड़ताल जारी है। दो दिन में पांवटा की ट्रक यूनियनों को करीब साठ लाख का नुकसान हो चुका है।
जबकि, सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों की आपूर्ति बाधित रहने से दो दिन में ही 40 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।सिरमौर ट्रक ऑपरेटर यूनियन प्रधान बलजीत सिंह नागरा ने कहा कि शनिवार को दूसरे दिन भी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रही।
इस दौरान सिरमौर ट्रक ऑपरेटर, सतौन, कमरऊ, खोड़ोवाला गिरिपार ट्रक और टैंपो यूनियनों की छोटी-बड़ी गाड़ियां खड़ी रहीं। राष्ट्रीय और प्रदेश यूनियनों के पदाधिकारियों से कोई सूचना नहीं मिली है।