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मोदी पर टिकीं तीन लाख लोगों की निगाहें, सरकार ने भेजी रिपोर्ट

Sun, 11 Dec 2016 12:02 AM IST
संजय भारद्वाज/ सुरेश तोमर/अमर उजाला, कफोटा (सिरमौर)
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गिरिपार इलाके में हाटी समाज के करीब तीन लाख लोगों की निगाहें अब मोदी सरकार पर टिक गई हैं। वैज्ञानिक ढंग से कराए गए सर्वे की रिपोर्ट के साथ ट्रांसगिरि को जनजातीय दर्जा देने का प्रस्ताव जनजातीय मामलों के मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल को भेज दिया गया है। यहां सबको उम्मीद है कि हिमाचल में कभी भाजपा के प्रभारी रहे नरेंद्र मोदी उनकी जरूरतों और भावनाओं को समझेंगे और उन्हें हक दिलाएंगे। यह मुद्दा एक बार फिर पूरे इलाके में गरमा गया है। 
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रविवार को ट्रांसगिरि के केंद्र कफोटा बाजार में एक दुकान के बाहर इसी मुद्दे पर कुछ लोग चर्चा कर रहे हैं। चर्चा में शामिल करीब 60 साल के दीपचंद पुंडीर कहते हैं- हाटियों को इस बार हक नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा। एसटी दर्जे के लिए कोई पीएम मोदी के नाम पर एतबार कर रहा है तो कोई राजनाथ सिंह के नाहन में किए चुनावी वायदे को याद दिला रहा है। गिरिपार क्षेत्र की 127 पंचायतों के सैकड़ों गांवों में इन दिनों हाटी समुदाय के लोग इसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।

जनजातीय दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार के पाले में है अब गेंद

हिमाचल सरकार ने प्रदेश विवि के जनजातीय अध्ययन संस्थान की सर्वेक्षण रिपोर्ट को आधार बनाकर केंद्र से गिरिपार के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने की फिर से सिफारिश की है। इसी मुद्दे पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सांसद वीरेंद्र कश्यप के नेतृत्व में 14 दिसंबर को केंद्रीय मंत्री और रजिस्ट्रार जनरल से मिलने फिर दिल्ली जा रहे हैं। 

गिरिपार के लोग रविवार को सोलन आ रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं। चूंकि, लोकसभा चुनाव के दौरान नाहन में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री ने भी गिरिपार जनजातीय दर्जा देने का वायदा किया था। अब केंद्र में भाजपा सत्ता में है। हाटी समुदाय को इस बार हक मिलने की पूरी उम्मीद है। 

एचपीयू की सर्वेक्षण रिपोर्ट पर सरकार ने फिर भेजी है सिफारिश

केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर का कहना है कि प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया को अपनाते हुए सर्वे रिपोर्ट के साथ केंद्र सरकार को मामला भेजा है। कहीं कोई कमी नहीं है। अब कोई तकनीकी पेच नहीं। जरूरत सिर्फ इच्छाशक्ति की है। केंद्रीय हाटी समिति के महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री का कहना है कि इस बार गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जे का दावा पुख्ता है। 

एसटी की पात्रता के लिए तय लोकुर कमीशन के मापदंडों को हाटी समुदाय पूरा करता है। समिति के प्रमुख सलाहकार डॉ. अमी चंद, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र तोमर का कहना है कि हाटी समुदाय के वंशजों को उत्तराखंड के जोनसार बावर में 1967 में ही एसटी का दर्जा मिल चुका है, इसलिए भी केंद्र के लिए फैसला लेना आसान है। सिरमौर युवा विकास मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि केंद्र के फैसले पर क्षेत्र के युवाओं का भविष्य टिका है।
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पांच दशकों से कर रहे संघर्ष, कई सिफारिशें

हिमाचल प्रदेश सरकार
आर्थिक और सामाजिक तौर पर पिछड़े गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय घोषित करने के लिए हाटी समुदाय करीब पांच दशक से संघर्ष कर रहा है। प्रशासन, सरकार के अलावा कई एजेंसियां इस के पक्ष में रिपोर्ट दे चुकी हैं। 1979 में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष एवं

अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य स्व. टीएस ठाकुर ने ट्रांसगिरि का भ्रमण कर सकारात्मक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी थी। 1993 में हिमाचल विधानसभा की ओर से गठित याचिका समिति ने रिपोर्ट में गिरिपार के लोगों की मांग को शत-प्रतिशत सही माना था। इसके अलावा जिला प्रशासन भी इस बारे में सर्वे के आधार पर कई रिपोर्ट भेज चुका है। 

भारत सरकार को भेजी जा चुकी रिपोर्ट: फारका 
हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा है कि गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के मामले पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय अध्ययन संस्थान से सर्वेक्षण करवाकर इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेज दी गई है। अब यह मामला भारत सरकार के पास ही विचाराधीन है।
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