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Natural Farming: प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ा रुझान, तीन साल में रासायनिक उर्वरकों की खपत 90 फीसदी कम

Tue, 11 Jul 2023 12:03 PM IST
Krishan Singh अनिल ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर

सार

बिलासपुर जिले में पिछले तीन साल में कृषि विभाग के पास रासायनिक उर्वरकों की सरकारी खपत में 90 फीसदी की कमी आई है। फसलों में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी आई है। 
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बिलासपुर में प्राकृतिक खेती। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 किसानों का प्राकृतिक खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। यही कारण है कि बिलासपुर जिले में पिछले तीन साल में कृषि विभाग के पास रासायनिक उर्वरकों की सरकारी खपत में 90 फीसदी की कमी आई है। फसलों में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी आई है। पिछले तीन साल से लगातार कृषि विभाग के पास आने वाली रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की खेप में कमी आई है। विभाग के पास हर साल 80 से 90 लाख रुपये के रासायनिक उर्वरक पहुंचते थे।

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अब यह आंकड़ा 10 से 12 लाख तक पहुंच गया है। इनमें स्प्रे पंप और अन्य उपकरण भी शामिल हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूरे देश में प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत सरकार की ओर से आतमा प्रोजेक्ट के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी प्रोजेक्ट के तहत जिले में 5100 किसान 600.80 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इन किसानों को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है। जिले में कुल 65,000 किसान खेती से जुड़े हैं।

176 पंचायतों में प्राकृतिक खेती के मॉडल लगाए
अभी तक इस प्रोजेक्ट के तहत 11,230 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। जिले की 176 पंचायतों में प्राकृतिक खेती के मॉडल लगाए गए हैं। इनमें सोयाबीन, मक्की, उड़द और अरहर की बिजाई की गई है। विभाग का प्रयास है कि सभी किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ें, जिससे रसायनों के दुष्प्रभावों से बचा जा सके।
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देसी गाय के गोबर-गोमूत्र से बनाएं खाद और कीटनाशक
किसान एक देसी गाय पालकर इसके गोबर और गोमूत्र से घटक जीवामृत, घनजीवामृत, अस्त्र आदि बनाकर 150 बीघा में खाद, कीटनाशक बनाकर खेती कर सकते हैं। इसके लिए विभाग की ओर से देसी गाय खरीदने के लिए अनुदान भी दिया जाता है।
 

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3104 किसानों का सितारा पोर्टल पर पंजीकरण
किसानों को अपने उत्पादों के बेहतर दाम मिलें, इसके लिए पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का सितारा पोर्टल पर पंजीकरण किया जा रहा है। अभी तक जिले में 3104 किसानों को इस पोर्टल पर पंजीकृत किया जा चुका है। पंजीकरण के बाद किसानों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।

प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन को मिल रहा बढ़ावा
प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को गोमूत्र की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए उन्हें देसी नस्ल की गाय पालनी पड़ती है। यही कारण है कि जितना अधिक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, उतना ही पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। आतमा प्रोजेक्ट के तहत किसानों को गाय खरीदने के लिए अनुदान भी प्रदान किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे भारतीय नस्ल की गाय को अधिक बढ़ावा मिल रहा है।

विभाग के पास रासायनिक उर्वरकों की खेप अब कम आ रही है। इसका बड़ा कारण है कि जिले में कई किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। स्वस्थ जीवन के लिए प्राकृतिक खेती उपयुक्त है। -डॉ. विनय कुमार सोनी, उपनिदेशक कृषि विभाग, बिलासपुर

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