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डॉक्टर-इंजीनियर से महंगे पड़ रहे शास्त्री बनाना, ये है वजह

Tue, 27 Feb 2018 02:15 PM IST
कपिल शर्मा, अमर उजाला, ज्वालामुखी (कांगड़ा)
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प्रदेश सरकार को डॉक्टर और इंजीनियर तैयार करने से ज्यादा मंहगे शास्त्री पड़ रहे हैं। सरकार को एक शास्त्री तैयार करने में करीब दस लाख रुपये खर्चा बैठ रहा है, जो कि डॉक्टर और इंजीनियर बनाने से अधिक है।

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ज्वालामुखी मंदिर न्यास के माध्यम से संचालित संस्कृत महाविद्यालय शिक्षा सत्र 2005 से लेकर 2014 तक कुल 62 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें 51 उत्तीर्ण हुए, जबकि नौ परीक्षार्थी फेल हो गए हैं। 

वहीं महाविद्यालय के संचालन के लिए करीब पांच लाख रुपये प्रति माह अध्यापकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के वेतन के लिए खर्च करना पड़ रहा है, जबकि अन्य प्रशासनिक खर्चे अलग हैं। 
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नौ सालों में करीब पांच करोड़ रुपये वेतन पर खर्च करने के लिए केवल 50 शास्त्री ही महाविद्यालय से पढ़ाई करके निकल पाए हैं। ऐसे में सरकार को संस्कृत महाविद्यालय ज्वालामुखी में दस लाख रुपये के करीब एक शास्त्री तैयार करने में खर्चा बैठ रहा है।

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साल 1987 से किया जा रहा संस्थान का संचालन

साल 1987 से ज्वालामुखी मंदिर के सरकारी अधिग्रहण के बाद मंदिर न्यास यहां संस्कृति संस्थान संचालित कर रहा है। साल 1987 से 1998 तक यह पाठशाला के रूप में संचालित किया जा रहा था, जबकि बाद में इसे महाविद्यालय का दर्जा दिया गया।

वर्ष 1987 से 2015-16 तक केवल मंदिर न्यास यहां पर प्राइवेट तौर पर संस्कृत की शिक्षा प्रदान कर रहा था। अब वर्ष साल 2016-17 के लिए प्राक शास्त्री प्रथम वर्ष के लिए हिप्र विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त हुई है।

मेरे पास मंदिर का अतिरिक्त कार्यभार है। मुझे महाविद्यालय के संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है। - वेद प्रकाश, कार्यकारी मंदिर अधिकारी ज्वालामुखी
 
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