प्रदेश सरकार को डॉक्टर और इंजीनियर तैयार करने से ज्यादा मंहगे शास्त्री पड़ रहे हैं। सरकार को एक शास्त्री तैयार करने में करीब दस लाख रुपये खर्चा बैठ रहा है, जो कि डॉक्टर और इंजीनियर बनाने से अधिक है।
ज्वालामुखी मंदिर न्यास के माध्यम से संचालित संस्कृत महाविद्यालय शिक्षा सत्र 2005 से लेकर 2014 तक कुल 62 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें 51 उत्तीर्ण हुए, जबकि नौ परीक्षार्थी फेल हो गए हैं।
वहीं महाविद्यालय के संचालन के लिए करीब पांच लाख रुपये प्रति माह अध्यापकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के वेतन के लिए खर्च करना पड़ रहा है, जबकि अन्य प्रशासनिक खर्चे अलग हैं।
नौ सालों में करीब पांच करोड़ रुपये वेतन पर खर्च करने के लिए केवल 50 शास्त्री ही महाविद्यालय से पढ़ाई करके निकल पाए हैं। ऐसे में सरकार को संस्कृत महाविद्यालय ज्वालामुखी में दस लाख रुपये के करीब एक शास्त्री तैयार करने में खर्चा बैठ रहा है।