साल 2020 में कालका शिमला यूनेस्को हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर ट्रेनें 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए 7 मोडिफाइड कोचों के साथ फाइनल ट्रायल किया जाएगा। बढ़ी हुई स्पीड के साथ ट्रायल के लिए रेलवे ने कोचों को परिवर्तित किया है। 4 कोच मॉडिफाइड कर दिए गए हैं, जबकि 3 अन्य कोचों पर काम प्रगति पर है।
काम पूरा होते ही 7 परिवर्तित कोचों के साथ फाइनल ट्रायल किया जाएगा। आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन) लखनऊ ने कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से गाड़ियां चलाने को पहले ही अनुमति दे दी है। हालांकि, इस ट्रैक पर 48 डिग्री तक के तीव्र घुमावदार मोड़ों और हर सौ, डेढ़ सौ मीटर पर टनल के कारण ट्रेन की स्पीड बढ़ाने में दिक्कत पेश आ सकती है।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक टीपी सिंह का कहना है कि कालका-शिमला ट्रैक पर गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए फाइनल ट्रायल किया जाएगा। इसके लिए 4 कोच मॉडिफाइड कर दिए गए हैं, जबकि 3 अन्य जल्द तैयार होने वाले हैं। परिवर्तित कोचों के साथ 15 दिन के भीतर फाइनल ट्रायल की तैयारी है।
मुख्यमंत्री जयराम ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से किया था आग्रह
कालका से शिमला आने वाली ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने का आग्रह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से किया था। गोयल ने आश्वासन दिया था कि जल्द ट्रेनों की रफ्तार 25 से बढ़ाकर 35 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी जाएगी।
5 से घट कर 4 घंटे में तय होगी 96 किमी दूरी
मौजूदा समय में कालका से शिमला की 96 किलोमीटर की दूरी ट्रेन 25 केएमपीएच की रफ्तार से औसतन 5 घंटे में तय करती है। स्पीड 30 केएमपीएच होने पर यह दूरी करीब 4 घंटे में तय हो सकेगी।
आरडीएसओ ने दिसंबर 2018 में किया था सफल ट्रायल
लखनऊ से आई आरडीएसओ की टीम ने दिसंबर 2018 में तीन दिन तक शिमला से शोघी के बीच ट्रेन के हाई स्पीड ट्रायल किए थे। ट्रायल के लिए नैरो गेज डीजल शेड कालका से लोको 706 (इंजन) शिमला लाया गया था। आरडीएसओ के डायरेक्टर टेस्टिंग की अगुवाई में ट्रायल किए गए थे।