दिवाली का यह पर्व बेशक रविवार को मनाया जा रहा हो, मगर पजौल गांव तो शनिवार को ही इस पर्व को मना गया। शिमला जिले के पजौल गांव में दिवाली एक दिन पहले ही शनिवार को मना दी गई। दिवाली के एक दिन पहले ही पूरा गांव जग-मग हो गया। लोगों ने खूब पटाखे फोड़े। सारी रात अलाव जलता रहा।
एक दिन पहले ही दिवाली मनाने का यह चलन यहां सदियों से चला आ रहा है। शिमला जिले के पजौल गांव में दिवाली को ‘दैवड़ा’ नाम से मनाया जाता है। हिमाचल के अन्य तमाम क्षेत्रों में दिवाली का यह पर्व बेशक रविवार को मनाया जा रहा हो, मगर पजौल गांव तो शनिवार को ही इस पर्व को मना गया।
लंका में रावण को मारकर राम की घर वापसी के इस पर्व पर इस गांव में भी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। एक दिन पहले ही ये पर्व क्यों मनाया जाता है। इसका सही-सही जवाब किसी के पास नहीं है। गांव के निवासी सुरेंद्र चौहान ने बताया कि पजौल गांव का ये ‘दैवड़ा’ पर्व पूरे क्षेत्र में मशहूर है।
परंपरा के मुताबिक शनिवार को ही यहां मटरैना (अलाव) जला दिया गया। शनिवार शाम को उन्होंने बताया कि लोग सारी रात इसे सेंकते हुए जागते रहेंगे। सवेरे कौलू देवता महाराज के प्रांगण में खील-बताशे बांटे जाएंगे। दिवाली का ये खास उत्सव चतुर्दशी को ही होगा।