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जल्द निपटा लें सारे जरूरी काम, होने वाली है देशव्यापी हड़ताल

Thu, 01 Sep 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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देश की 10 ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों ने दो सितंबर को भारत बंद का एलान किया है। शुक्रवार को हिमाचल में भी हड़ताल की जाएगी। ट्रेड यूनियनों सहित विभिन्न फेडरेशन और सामाजिक संगठन भी हड़ताल में शामिल होंगे।
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केंद्र की नीतियों के खिलाफ मुखर ट्रेड यूनियनों की दो सितंबर को प्रदेश में कई जगह चक्का जाम करने की योजना है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी प्रदर्शनकारी बंद करवाने का प्रयास करेंगे। ऐसे में आम जनता को दो सितंबर को कई परेशानियां पेश आ सकती हैं।

देशव्यापी हड़ताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिड-डे मिल वर्कर भी शामिल होंगे। स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन को बनाने की व्यवस्था भी प्रभावित होगी। बैंक यूनियन, बिजली बोर्ड यूनियन, एलआईसी यूनियनों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है।
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सीटू राज्य कमेटी का कहना है कि केंद्र सरकार ने बेशक न्यूनतम दिहाड़ी 350 रुपये और बकाया वेतन की घोषणा कर दी है, लेकिन यह वेतन केवल 9100 रुपये मासिक बनता है। ट्रेड यूनियनों ने मासिक 18 हजार रुपये की मांग रखी थी। राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा कि इसके अलावा 11 अन्य मुद्दे हैं, जिनपर केंद्र की मोदी सरकार ने कोई भी प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया है। ऐसे में हड़ताल होकर रहेगी।
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हिमाचल समेत देश भर में ठप हो सकता है यातायात

कहा कि हड़ताल से दो दिन पहले दो बातों की घोषणा कर केंद्र सरकार मजदूरों और कर्मचारियों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। मजदूर भ्रमित हो जाएंगे, ऐसा सोचना केंद्र सरकार की भूल है। सीटू राज्य कमेटी ने सभी निजी बसों, टैक्सी, टैंपो और ट्रक चालकों-मालिकों से अपील की है कि ट्रांसपोर्ट को बंद करके मोटर व्हीकल एक्ट में मालिक और चालक विरोधी संशोधनों तथा सड़क सुरक्षा अधिनियम को करारा जवाब दें।

उन्होंने कारोबारियों सहित रेहड़ी फड़ी वालों से भी हड़ताल में सहयोग करने की मांग की है। सीटू के अलावा मजदूर संगठन एटक, इंटक, एचएमएस, सेवा और एआईटीयूयूसी भी दो सितंबर को राष्ट्र व्यापी हड़ताल में शामिल होंगे।

किसान सभा का भी हड़ताल को समर्थन
देशव्यापी हड़ताल में हिमाचल किसान सभा भी शामिल होगी। राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर तथा सह सचिव सत्यवान पुंडीर ने केंद्र के सवा दो साल के शासन को किसान-मजदूर विरोधी करार दिया है।

उन्होंने कहा कि यह विरोधाभास समझ से परे है कि एक तरफ  देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं दूसरी ओर सरकार बड़े कारपोरेट एवं औद्योगिक घरानों को करोड़ों रुपयों का अनुदान दे रही है। मोदी सरकार ने श्रम कानूनों में बदलाव करके मजदूरों को अपने बुनियादी अधिकारों को प्राप्त करने से भी वंचित कर दिया है।
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