शिमला शहर के 10 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से अधिक नामी स्कूल, बड़े उच्च शिक्षण संस्थान, कॉलेज और प्रोफेशनल संस्थान मौजूद हैं। स्कूलों के सर्कुलर सड़क पर स्थित होने और इन स्कूलों के पास अपनी पार्किंग की सुविधा न होने से रोज वाहनों का लंबा जाम लगता है। सरकारी कार्यालयों में रोजाना सफर करने वाले हजारों कर्मचारियों की गाड़ियों, अस्पतालों में आने वाले मरीजों के वाहनों के अलावा निजी तथा सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं के लिए चलने वाली टैक्सियों और बसों के कारण सर्कुलर सड़क पर ट्रैफिक का बोझ दो दशकों में कई गुना बढ़ गया है। राजधानी होने के कारण सरकारी कार्यालयों के निदेशालय भी शिमला में हैं। इसमें सैकड़ों कर्मचारी आवाजाही करते हैं।
राजधानी शिमला के 10 किलोमीटर के दायरे में कई नामी स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान हैं। इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों का सर्कुलर सड़क और शहर की मुख्य सड़कों से ही आना-जाना होता है। सर्कुलर रोड के आसपास 11 सरकारी और निजी स्कूल हैं। इनमें लोरेटो कॉन्वेंट ताराहॉल, सेंट एडवर्ड, कॉन्वेंट ऑफ जीजस एंड मैरी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लालपानी, एसडी सीनियर सेकेंडरी, दयानंद पब्लिक स्कूल, केंद्रीय विद्यालय जाखू, आर्य समाज स्कूल, सेंट थॉमस, पोर्टमोर गर्ल्स स्कूल, संजौली गवर्नमेंट स्कूल और मोनाल पब्लिक स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या न्यूनतम 500 से लेकर अधिकतम 3,000 तक है। सर्कुलर सड़क के किनारे स्थित बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में आरकेएमवी, सेंट बेड्स, राजीव गांधी महाविद्यालय चौड़ा मैदान शामिल है। इसके अलावा एचपीयू, संजौली कॉलेज, यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इवनिंग स्टडीज जैसे बड़े शिक्षण संस्थान भी शिमला में हैं। हर संस्थान में दो हजार से अधिक विद्यार्थी हैं।
सुबह 8:00 से 10:30 बजे तक और दोपहर बाद 3:00 से शाम 5:30 बजे तक सर्कुलर सड़क पर वाहनों की संख्या बेतहाशा बढ़ जाती है, जो शहर में मुख्य रूप से जाम का कारण बनती है। इन पीक ऑवर्स में ही स्कूली विद्यार्थियों के लिए परिवहन निगम की 38 चार्टर्ड बसों के अलावा सैकड़ों निजी स्कूल टैक्सियां, बसें और सरकारी कर्मचारियों के निजी वाहन एक साथ सड़कों पर निकलते हैं। इस वजह से पूरी राजधानी में चक्का जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।