कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के सब्जी विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने सब्जियों में ग्राफ्टिंग तकनीक पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आलू और टमाटर का पौधा उतनी ही पैदावार देता है, जितना एक सामान्य टमाटर या आलू का पौधा देता है।
दोनों की एक ही प्रजाति है। किसानों को खुद ग्राफ्टिंग करनी होती है। उन्होंने कहा कि टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मिर्च व आलू, टमाटर कूहल की सब्जियां हैं। जिनका उत्पादन प्रदेश में व्यापक स्तर पर नकदी फसल के तौर पर हो रहा है और इन फसलों का किसानों की आजीविका सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है।
फसलों में बैक्टीरियल विल्ट व निमाटोड बीमारी गंभीर समस्या है। जिनका उचित प्रबंधन न होने से किसानों को नुकसान होता है। किसान इन समस्याओं के प्रबंधन के लिए कई दवाइयों इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनका उचित प्रबंधन नहीं हो पाता और किसान की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी होती है। ऐसी स्थिति में ग्राफ्टिंग तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। अभी तक यह तकनीक जापान, कोरिया, स्पेन, इटली जैसे देशों में ही लोकप्रिय है।
25 से अधिक बैक्टीरियल विल्ट चिह्नित
भारत में पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय इस तकनीक को लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यहां लगभग 25 से अधिक बैक्टीरियल विल्ट व निमाटोड प्रतिरोधी रूट स्टॉक की पहचान की है।