धामी, कसुम्पटी डिवीजन में करोड़ों के सड़क टारिंग के काम अटके, टेंडर किए जाने के बावजूद ठेकेदार नहीं करवा पा रहे काम
15 नवंबर तक टारिंग सीजन तक काम पूरे होने पर संशय
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला बिटुमेन की कमी के चलते सड़कों की टारिंग और पैचवर्क के काम अटक गए हैं। शहर से सटे शिमला ग्रामीण और कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में बिटुमेन की लगातार चल रही कमी के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। करोड़ों के टारिंग और पैच वर्क के काम अटके हुए हैं। पानीपत से ही बिटुमेन मांग के अनुसार सप्लाई नहीं हो रहा है। इससे ठेकेदार टारिंग और पैच लगाने के कार्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। यह संकट जारी रहा, तो शायद ही इस सीजन में टारिंग के काम पूरे हों। ऐसा होने पर फिर सड़कों के रखरखाव के ये काम अप्रैल 2027 तक टल जाएंगे।
अकेले लोक निर्माण विभाग के कसुम्पटी डिवीजन में ही करीब चार करोड़ के काम अटके हुए हैं। इनमें पीएमजीएसवाई के तहत टारिंग वाली सड़कों के अलावा एएमपी के तहत सड़कों में दो, तीन किलोमीटर की टारिंग के कार्य के अलावा सड़कों की दशा सुधारने को बरसात के बाद किए जाने वाले पैचवर्क का काम भी नहीं हो पा रहा है। इन सभी कार्यों का आवंटन किया जा चुका है, मगर बिटुमेन की सप्लाई कम आने से काम नहीं हो पा रहे हैं।
कसुम्पटी डिवीजन के अधिशासी अभियंता नवीन कौंडल ने माना कि उनके डिवीजन में चार मुख्य सड़कों में करीब 50 लाख से पैचवर्क करवाया जाना है। वहीं, ग्यारह किलोमीटर के एएमपी के तहत तीन सड़कों में टारिंग की जानी है। इनमें ढली-तत्तापानी सड़क में चार किलोमीटर, मशोबरा-भेखलटी सड़क में तीन किलोमीटर और मैहली-जुन्गा सड़क में चार किलोमीटर में टारिंग की जानी है। यह काम आवंटित किए गए हैं, बावजूद इसके टारिंग नहीं हो पा रही है।
यही नहीं, इस डिवीजन में पीएमजीएसवाई के तहत हो रहे जनेड़घाट-डुब्बलू सड़क निर्माण में दस किलोमीटर का टारिंग काम भी बिटुमेन न मिलने से नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा नाबार्ड के तहत बनी चाईना-बड़फर की तीन किलोमीटर टारिंग भी शुरू नहीं हो पाई है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के धामी डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश अग्रवाल ने माना कि उनके टारिंग के काम अवार्ड किए जाने के बावजूद बिटुमेन न मिलने से शुरू नहीं हो पा रहे हैं। समूचे प्रदेश में हालात यही हैं, काम अटके हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनके डिवीजन की पांच सड़कों के लाखों के होने वाले पैचवर्क नहीं हो पा रहे हैं। वहीं, चार सड़कों में होने वाला 15 से 20 किलोमीटर टारिंग का काम नहीं हो पा रहा है। पांच से छह सड़कों का पैच वर्क भी अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों में होने वाला नया टारिंग का कार्य भी बिटुमेन न आने से रुका हुआ है। करोड़ों के ये काम सप्लाई नियमित होने पर ही संभव हो सकेंगे।
लोक निर्माण विभाग का टारिंग का सीजन 15 नवंबर तक ही रहता है। इसके बाद सिर्फ गर्म क्षेत्रों में और मौसम साफ रहने पर ही टारिंग और पैच लगाने का काम संभव होता है। इस सीमित समय में बिटुमेन की आपूर्ति नियमित न हुई, तो टारिंग और पैचवर्क का काम अप्रैल के टारिंग सीजन तक लटक जाएगा।