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Shimla News: आईजीएमसी की सरकारी लैब में थायराइड टेस्ट बंद

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मरीजों को टेस्ट के लिए निजी लैब में खाने पड़ते हैं धक्के, अस्पताल प्रबंधन भी सरकारी लैब की ओर नहीं दे रहा ध्यान
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क्रस्ना लैब में भी मरीजों की लगती हैं लंबी कतारें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में दो माह से सरकारी लैब में थायराइड टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इस कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में थायराइड टेस्ट करने वाली मशीन दो माह से खराब है। इसे अस्पताल प्रबंधन दुरुस्त नहीं करवा पा रहा है। ऐसे में मरीज अस्पताल की सरकारी लैब में टेस्ट नहीं करवा पा रहे हैं। हालांकि अस्पताल में निजी क्रस्ना लैब में टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को भेजा जा रहा है लेकिन वहां भीड़ लगी रहती है। इससे मरीज लाइन में खड़े होने की बजाय बाहरी लैब में टेस्ट करवाने पर मजबूर हो रहे हैं।
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मरीजों ने कई बार अस्पताल प्रबंधन से मशीन दुरुस्त करवाने का आग्रह कर किया लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 16 अप्रैल से गायनी ओपीडी भी आईजीएमसी में चल रही है। महिलाओं को उपचार के लिए थायराइड टेस्ट लिखा जाता है लेकिन यह भी सरकारी लैब में टेस्ट सुविधा न होने से दिक्कत में हैं। बुजुर्ग और अन्य मरीज जिन्हें ओपीडी से थायराइड के टेस्ट लिखे जा रहे हैं उन्हें निजी लैब में धक्के खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। मरीजों को आ रही समस्या पर अस्पताल प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।



निजी लैब में 300 से 700 रुपये में होता टेस्ट
अस्पताल की सरकारी लैब में थायराइड टेस्ट निशुल्क होता है। वहीं बाहरी लैब में 300 से 700 रुपये में टेस्ट किए जाते हैं। अस्पताल में टेस्ट न होने के कारण मुफ्त में होने वाले टेस्ट के मरीजों को पैसे अदा करने पड़ते हैं। इस कारण मरीजों की जेब का बोझ भी बढ़ रहा है। टेस्ट के लिए धक्के खाने के कारण उपचार में भी देरी हो रही है।
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क्रस्ना लैब में 12:00 बजे के बाद लिए जाते हैं सैंपल
आईजीएमसी में मरीज थायराइड टेस्ट के लिए क्रस्ना लैब का भी रुख करते हैं लेकिन यहां पर 12:00 बजे से पहले सैंपल नहीं लिए जाते। ऐसे में यहां पर अन्य टेस्ट के लिए भी मरीजों की लंबी कतारें लग जाती है। सोमवार को टेस्ट के लिए क्रस्ना लैब में लंबी कतारें लगी रही। मरीजों को सैंपल देने के लिए पंजीकरण काउंटर के बाद सैंपल कलेक्शन सेंटर के बाहर कतारों में लगना पड़ा।
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