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Shimla News: सरकारी लैब में थायराइड और बी-12 के टेस्ट बंद

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आईजीएमसी में मरीजों को झेलनी पड़ रही परेशानी, लिवर फंक्शन टेस्ट भी नहीं हो रहा
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निजी क्रस्ना लैब के बाहर लग रही हैं लंबी कतारें

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला की केंद्रीय प्रयोगशाला में कई आवश्यक पैथोलॉजी जांचें नियमित रूप से नहीं हो रही। सरकारी लैब में कई महीनों से थायराइड प्रोफाइल, विटामिन बी-12, लिवर फंक्शन (एलएफटी) टेस्ट बंद पड़े हैं।

इन टेस्टों के न होने से मरीजों को क्रस्ना लैब में जाना पड़ रहा है। क्रस्ना लैब को सरकार ने अधिकृत कर रखा है और यहां सभी टेस्ट सरकारी नियमों के मुताबिक होते हैं लेकिन सरकारी लैब में टेस्ट न होने के कारण यहां बोझ बढ़ने से मरीजों को घंटों लाइनों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा मरीजों को निजी लैब में महंगे दामों पर जांच करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जांच किट की कमी और समय पर आपूर्ति न होने के कारण यह टेस्ट सरकारी लैब में बंद पड़े हैं। थायराइड प्रोफाइल जांच हार्मोन असंतुलन, वजन में अचानक बदलाव, थकान और हृदय से जुड़ी समस्याओं के आकलन के लिए जरूरी मानी जाती है। वहीं विटामिन बी-12 की जांच एनीमिया, नसों से संबंधित रोगों और कमजोरी के कारणों का पता लगाने में सहायक होती है। इसी तरह एलएफटी का उपयोग पीलिया, हेपेटाइटिस और अन्य लिवर रोगों की स्थिति जानने के लिए किया जाता है। डॉक्टरों को इन रिपोर्टों के बिना रोग की सही पहचान और दवाओं की सटीक मात्रा तय करना कठिन हो जाता है।
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रोजाना सैकड़ों मरीज आईजीएमसी की लैब पर निर्भर रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की होती है। ऐसे मरीजों के लिए निजी लैब में जांच कराना अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है। कई मामलों में रिपोर्ट देर से मिलने के कारण इलाज आगे नहीं बढ़ाया जा सका है। इससे न केवल मरीजों की परेशानी बढ़ती है बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लैब के लिए आवश्यक किटों की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
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