हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में राजधानी में सरकारी गाड़ी की चपेट में आने से तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। इसकी पहचान नैंसी पुत्री नागेंद्र झारखंड निवासी के तौर पर हुई है। यह मासूम प्रवासी मजदूर की इकलौती बेटी थी। प्रारंभिक जांच के मुताबिक सरकारी गाड़ी हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार जनरल के नाम से दर्ज है।
पुलिस गाड़ी चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। घटना शुक्रवार दोपहर छोटा शिमला थाना के तहत बैनमोर वार्ड की है। पुलिस के मुताबिक प्रवासी मजदूर निर्माण कार्य में लगे थे। मजदूर नागेंद्र ने तीन साल की बेटी को सड़क किनारे सुलाया था। इसी दौरान करीब 12:30 बजे शिल्ली चौक-राजभवन प्रतिबंधित सड़क पर सरकारी गाड़ी गुजर रही थी।
एक निजी होटल के समीप यह हादसा पेश आया। गाड़ी की चपेट में आने से बच्ची लहूलुहान हो गई। हादसे के बाद चालक बच्ची को इलाज के लिए आईजीएमसी ले गया। लेकिन उपचार के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया। उधर, पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्रित किए हैं। छोटा शिमला थाना पुलिस ने चालक के खिलाफ लापरवाही का केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
एएसपी नवदीप सिंह ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच जारी है। इससे पहले साल 2019 में सदर थाना के भराड़ी इलाके में एक पिकअप ने सड़क किनारे सो रही नौ माह की बच्ची को कुचल दिया था। हादसे में उसकी मौत हो गई थी। वह भी प्रवासी मजदूर की बेटी थी। इसके अलावा बीते साल भी पुराने बस स्टैंड और क्रॉसिंग के पास भी बसों की चपेट में आने से दो राहगीरों की मौत हुई थी।
तेज रफ्तार से दौड़ रहीं गाड़ियां : किमी
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी गाड़ियों की रफ्तार नहीं थम रही है। प्रतिबंधित रोड पर भी कई गाड़ियां निर्धारित गति से अधिक रफ्तार से दौड़ रही हैं। इससे वाहनों की ओवरस्पीड आफत बन गई है। पूर्व वार्ड पार्षद किमी सूद ने कहा कि भीड़भाड़ वाली जगह न होने के बावजूद यहां हादसा होना दुखद है।