नसबंदी के बाद इन्हें छोड़ने के लिए भी स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं। उन स्थानों के आसपास खाने-पीने की भी व्यवस्था देखी जा रही है। विभाग ने यह कवायद ऐसे समय में शुरू की है, जब उसके नसबंदी अभियान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सवाल उठा रहे हैं।
कपूर ने बताया कि बंदरों को नगर निगम शिमला समेत प्रदेश की 38 तहसीलों में वर्मिन घोषित किया है। वर्मिन घोषित करने की मियाद 24 दिसंबर को खत्म हो रही है। अभी तक महज पांच बंदर ही मारे गए हैं।
ऐसे में पंचायतों को नए सिरे से जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। विभाग के फील्ड अफसरों को कहा गया है कि वह पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बंदरों की समस्या से निपटने के लिए चर्चा कर कदम उठाएं।