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श्रीखंड यात्रा पर गए 3 श्रद्धालुओं की मौत, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

Thu, 21 Jul 2016 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
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हिमाचल में धार्मिक श्रीखंड यात्रा के दौरान बुधवार को तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। एक श्रद्धालु के सिर पर पत्थर गिर गया जबकि दूसरे की जान निमोनिया ने ले ली। तीसरे यात्री ने ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया।
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ये श्रद्धालु पंजाब के जालंधर, उत्तर प्रदेश के अयोध्या और आनी के बटाला खनी के रहने वाले थे। डीएसपी आनी अलदेव ठाकुर ने बताया कि उमेश प्रताप (24) सुपुत्र भानू प्रताप अयोध्या यूपी का रहने वाला था।

उमेश के सिर पर मंगलवार शाम श्रीखंड महादेव के दर्शन कर लौटते समय थाचडू के पास पहाड़ी से पत्थर गिर गया। डॉक्टरों ने उनका इलाज किया लेकिन बुधवार को उमेश ने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि उमेश शुगर का मरीज था।
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निमोनिया और ऑक्सीजन की कमी से भी मौतें

जालंधर के जतिन आनंद (27) सुपुत्र सतीश आनंद को श्रीखंड जाते समय पार्वती बाग के पास निमोनिया हो गया। डॉक्टर जतिन को भी नहीं बचा पाए। उधर, दयाल चंद (35) बटाला खनी आनी की थाचडू के पास ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई।

एसडीएम आनी डॉ. सीएल चौहान ने तीनों यात्रियों की मौत की पुष्टि की है। उन्होंने श्रीखंड जाने वाले यात्रियों से अपील की है कि वे मादक पदार्थों का सेवन न करें। यात्रा बहुत कठिन है। 18,000 फीट ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी है। खुद को अस्वस्थ महसूस करने वाले श्रद्धालु यात्रा न करें।

कल जाओं पहुंचाए जाएंगे शव

रेस्क्यू दल तीनों शवों को ला रहा है। वीरवार तक तीनों शवों को निरमंड के जाओं तक पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद तीनों का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।

साढ़े तीन हजार श्रद्धालु कर चुके दर्शन
इस साल श्रीखंड यात्रा में चार हजार से अधिक श्रद्धालुओं का पंजीकरण हो चुका हैं, जिनमें से करीब साढ़े तीन हजार श्रद्धालु दर्शन कर लौट चुके हैं।  

25 जुलाई को जाएगा अंतिम जत्था
श्रीखंड यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का 25 जुलाई तक पंजीकरण करवाया जा रहा है। 25 को यात्रियों का अंतिम जत्था रवाना होगा। सभी यात्रियों को 30 जुलाई तक वापस पहुंचाकर प्रशासन तीनों बेस कैंप हटा देगा।

श्रीखंड महादेव की कठिन यात्रा में अब तक 19 मौतें

समंदर तल से 18570 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव की कठिन यात्रा श्रद्धालुओं की जान पर भारी पड़ रही है। अधिकारिक तौर पर इस यात्रा के दौरान पिछले तीन सालों में नौ श्रद्धालुओं की मौत होने की बात कही जा रही है।

वर्ष 2014 में पांच 2015 में एक और 2016 में तीन मौतें हो चुकी हैं। जबकि इससे पूर्व 10 से अधिक श्रद्धालु इस यात्रा में अपनी जान गंवा चुके हैं। इस यात्रा में प्रतिवर्ष देश और प्रदेश से हजारों शिव भक्त पहुंचते हैं।

मैदानी क्षेत्रों से होने के कारण कई लोग पैदल यात्रा करने में असमर्थ होते हैं तो कई इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के चलते अधिक देर तक यहां नहीं ठहर पाते। जोखिम भरी यात्रा को देखते हुए सरकार ने बीते तीन सालों से इस ऐतिहासिक यात्रा को ट्रस्ट के अधीन करवाने का निर्णय लिया।

इसके बाद यह यात्रा प्रशासन के सहयोग से करवाई जाती है। मेडिकल फिटनेस के बाद ही यात्रियों का पंजीकरण करवाया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए तीन बेस कैंप स्थापित किए गए। पहला बेस कैंप सिंहगाड, दूसरा थाचडू और तीसरा बेस कैंप भीमडवारी में स्थापित किया गया।
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रास्ते में क्या हैं खामियां

हर बेस कैंप में डाक्टरों की टीम सहित पुलिस और होमगार्ड के जवानों को तैनात किया गया है। प्रशिक्षित रेस्क्यू दल भी हर समय मौजूद है। इसके बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चूक कहां हो रही है? सूत्रों के मुताबिक कुछ लोग यात्रा के दौरान नशीले पदार्थों का भी सेवन कर रहे हैं, जो जोखिम भरा साबित हो रहा है।

भारी बारिश के चलते प्रशासन ने लगा दी थी यात्रा पर रोक
वर्ष 2015 में श्रीखंड क्षेत्र में हुई भारी बारिश के चलते प्रशासन ने केवल पांच दिन बाद ही यात्रा पर रोक लगा दी थी। यहां कई स्थानों पर बादल फटने से रास्ते टूट गए थे।

रास्ते में क्या हैं खामियां
करीब 35 किमी की पैदल यात्रा कर श्रद्धालु श्रीखंड महादेव पहुंचते हैं। इस बीच कई खतरनाक पहाड़ियों और संकरे रास्तों को पार करना पड़ता हैं। कई स्थानों पर ग्लेशियरों पर से गुजरना पड़ता है। अधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आक्सीजन की कमी होनी शुरू हो जाती हैं। मौसम खराब होने पर क्षेत्र में भारी बारिश भी होती है।

कैसे करें यात्रा
जो यात्री मेडिकल तौर पर अपने आप को अनफिट महसूस करते हैं वो यात्रा न करें। यात्रा पर निकले यात्री को अपने साथ गर्म कपडे़, मोटी जुराबें, छाता, डंडा, टार्च, जरूरी दवाइयां अपने साथ रखना अनिवार्य है।
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