विदेश में जानेंगे पेयजल योजना से जुड़े पहलु, सवाल-तीन माह बाद रिटायर हो रहे अभियंता के दौरे का किसको होगा लाभ
एक्सपोजर विजिट पर 14 सितंबर को फ्रांस होंगे रवाना
महापौर बोले, गुपचुप बना लिया दौरा, निगम से पूछा ही नहीं
अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में तैनात तीन अधिकारियों को सरकार एक्सपोजर विजिट पर फ्रांस भेज रही है। शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने की योजना से जुड़े इस एक्सपोजर विजिट के लिए 14 सितंबर को यह अधिकारी फ्रांस के लिए रवाना होंगे।
इनके वीजा से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। खास बात यह है कि इन तीन अधिकारियों में एक अफसर ऐसे हैं जो इसी साल दिसंबर में बाद रिटायर हो रहे हैं। गुपचुप तैयार किए इस दौरे पर अब राजधानी में घमासान मच गया है। नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान ने गुपचुप तैयार किए इस दौरे पर सवाल उठाए हैं। साथ ही सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मामले की शिकायत की बात कही है।
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कंपनी के अनुसार प्रधान सचिव देवेश कुमार, प्रबंध निदेशक वीरेंद्र सिंह ठाकुर और एजीएम पीपी शर्मा फ्रांस जा रहे हैं। कंपनी के अनुसार शिमला में 24 घंटे पानी देने की योजना का काम संभाल रही स्वेज इंडिया कंपनी अधिकारियों को यह एक्सपोजर विजिट करवाएगी। इसमें पेयजल व्यवस्था को लेकर जानकारी दी जाएगी।
इसलिए उठ रहे सवाल
फ्रांस दौरे पर जा रहे एजीएम यानि अधिशासी अभियंता पीपी शर्मा इसी साल दिसंबर में रिटायर हो रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कंपनी उन्हें दौरे पर भेज रही है। कंपनी से लेकर नगर निगम तक में उनके दौरे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सवाल हो रहे हैं कि जो अधिकारी चंद महीने बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें एक्सपोजर विजिट करवाने से क्या फायदा होने वाला है।
अधिकारी सैर सपाटे करें, हम
जवाब ही देते रहें : महापौर
नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान तक को एक्सपोजर विजिट की सूचना नहीं दी गई। महापौर को मंगलवार शाम इसका पता लगा तो इस पर सवाल उठाए। कहा कि कंपनी में निगम की 51 फीसदी हिस्सेदारी है लेकिन कंपनी ने गुपचुप अफसरों के सैर सपाटे के लिए फ्रांस का दौरा बना लिया। नगर निगम को इसकी सूचना तक नहीं दी। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महापौर ने कहा कि पेयजल से जुड़ी शिकायतों पर चुने हुए प्रतिनिधि जनता को जवाब देते हैं, उनकी आलोचना सहते हैं। लेकिन जिन्हें जवाब देना चाहिए वह सैर सपाटे कर रहे हैं। यदि एक्सपोजर विजिट बनाना ही था तो नगर निगम को भी इसकी सूचना देते। जनता के चुने हुए प्रतिनिधि भी इस दौरे में शामिल होते ताकि शहर में लागू होने वाली इस योजना का बेहतर काम हो पाता। प्रतिनिधियों को पता है कि व्यवस्था में कहां कमियां है, जनता क्या चाहती है। लेकिन कंपनी ने हमें दौरे तक की जानकारी नहीं दी।