कार्यकारी उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने बताया कि अभियान को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ कर बालिका गौरव उद्यान योजना भी शुरू की गई है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र तेगटा ने बताया कि जिले में शिशु लिंगानुपात में सुधार और 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग की शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सभी को सक्रिय भागीदारी एवं समन्वित प्रयासों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अमर उजाला का अपराजिता अभियान भी महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा और उनके सम्मान के लिए बने कानूनों के प्रति शिक्षित करता है। इस कार्यक्रम के तहत सरकारी और निजी स्कूल-कॉलेजों में छात्राओं और अन्य संस्थाओं में महिलाओं को जागरूक किया जाता है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में जिला सिरमौर देश की टॉप टेन पंचायतों में शामिल हो गया है। अभियान के सफल कार्यान्वयन को लेकर सिरमौर जिले का नाम देश में रोशन हुआ है।
उपायुक्त डॉ. आरके परूथी ने बताया कि जिले में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को एक जन आंदोलन का रूप देकर लोगों को समाज में बेटी के महत्व बारे जागरूक किया गया।
इसके परिणामस्वरूप जिला में गत वर्ष के दौरान एक हजार बालकों के मुकाबले 1004 कन्याओं का जन्म हुआ है, जो कार्यक्रम की बहुत बड़ी उपलब्धि है । देश के 648 जिलों में से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 जिलों का चयन हुआ है, जिसमें सिरमौर भी एक है।
सात अगस्त को दिल्ली में एक भव्य समारोह के दौरान सर्वश्रेष्ठ आने वाले 10 जिलों को सम्मानित किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि गत वर्ष के दौरान पांवटा साहिब विकास खंड में 1509 बालकों के मुकाबले 1588 कन्याओं ने जन्म लिया था।
सिरमौर में 2011 की जनगणना के मुताबिक कन्या जन्म दर लिंगानुपात 918 था, जो अब बढ़कर 963 हो गया है। नाहन विकास खंड की क्यारी पंचायत ने 2014 के आंकड़ों के अनुसार 1000 बेटों की तुलना में 1431 बेटियों ने जन्म लिया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मदन सिंह चौहान ने बताया कि 2018-19 के दौरान जिले में कन्या शिशु लिंगानुपात 1004 दर्ज होने के आधार पर सिरमौर जिले को सर्वश्रेष्ठ अवार्ड मिलेगा। यह जिला के लिए गौरव का विषय है। इस बारे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से पत्र प्राप्त हुआ है।