फंड जारी करने के साथ केंद्र ने नियम और शर्तें भी लगाई हैं। इस राशि को अन्य मद पर खर्च नहीं किया जा सकेगा। सरकार को इन प्रोजेक्टों की तिमाही वित्तीय प्रगति रिपोर्ट भी भेजनी होगी। धनराशि खर्च करने के बाद सरकार को बताना होगा कि राशि कहां खर्च की गई है।
प्रोजेक्ट से संबंधित कोई भी कदम उठाने से पहले केंद्र सरकार से स्वीकृति लेना जरूरी होगा। अवर सचिव झा ने कहा कि कृषि, राज्य सरकार की ग्रांट इन एड, केंद्रीय प्रायोजित स्कीम, केंद्रीय वित्तीय सहायता या हिस्सेदारी, हरित क्रांति और कृषोन्नति योजना, बीज और पौध सामग्री जैसे मदों पर धनराशि व्यय की
जा सकती है। पत्र में कहा है कि सरकार का वित्त विभाग केंद्र से जारी राशि को 15 दिन के भीतर देगा। अगर उपयोगिता प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता है तो खर्च स्वयत: गलत माना जाएगा। शर्तों और नियमों के अनुसार इस व्यय की गई राशि को वापस करना होगा।