प्रदेश के करीब 6800 पंचायत वाटर गार्ड तपोवन में होने वाले विधानसभा सत्र में अपने गुस्से का इजहार करेंगे। इसके लिए आठ दिसंबर को प्रदर्शन की तैयारी कर ली गई है।
प्रदेश इंटक महासचिव सीताराम सैणी और अध्यक्ष बावा हरदीप सिंह की अगुवाई में आठ दिसंबर को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिलकर अपनी समस्या भी बताएंगे।
प्रदेश वाटर गार्ड संघ के महासचिव संजय ने बताया कि महंगाई के जमाने में पंचायत वाटर गार्ड वर्षों से मात्र 1350 रुपये में सेवाएं दे रहे हैं। सरकार ने उनके लिए न तो पॉलिसी बनाई और न ही वेतन बढ़ाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आईपीएच विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से लिए गए साक्षात्कार से उनका चयन किया था। उस दौरान मात्र 750 रुपये वेतन निर्धारित किया गया था।
उसके बाद वेतन में मामूली बढ़ोतरी हुई है। सरकार उनके हित में कोई भी पॉलिसी बनाने में नाकाम रही। इसके चलते वाटर गार्डों में सरकार को लेकर रोष है।