हिमाचल के हजारों बागवानों से सेब और आम फसल बीमा के नाम पर धोखा हुआ है। प्रदेश के सभी बागवानों को फसल बीमा के दायरे में लाना तो दूर जिन बागवानों का पहले बीमा किया गया था, उन्हें भी अब इससे बाहर कर दिया है।
ऐसे हजारों बागवानों का प्रीमियम कंपनियां वापस कर रही हैं, जिन्होंने इस साल फसल बीमा करवाया था। तर्क ये दिया जा रहा है कि समय पर इनके आवेदन ही नहीं मिले।
बागवानों का कहना है कि आवेदन के लिए महज एक सप्ताह का समय दिया और उसकी भी जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच सकी। प्रदेश में इस साल मौसम की बेरुखी के चलते हजारों बागवानों ने फसल बीमा के लिए आवेदन किया था।
अभी तक प्रदेश के सभी सेब और आम उत्पादक क्षेत्र फसल बीमा योजना के दायरे में नहीं हैं। जिन क्षेत्रों को कवर किया गया है, उनमें भी 40 हजार बागवानों का ही पिछले वर्ष बीमा किया गया।
इस साल इनमें से आधे ही बागवान बीमा कवर ले सके हैं। कम समय के कारण कई आवेदन नहीं कर पाए, तो कइयों के आवेदन ही रद्द कर दिए। नए बागवानों को भी फसल बीमा लाभ का मौका नहीं दिया गया।
इस साल अप्रैल माह में पहले आचार संहिता का पेंच बताकर आवेदन मंजूर नहीं किए। बाद में यह पेंच हटा तो बागवानों को एक सप्ताह का वक्त देकर आवेदन मांगे।
किसी तरह बागवानों ने इसके लिए आवेदन किए, लेकिन अब बड़ी संख्या में इन आवेदनों को रद्द कर प्रीमियम लौटाया जा रहा है। कई बागवानों ने इसकी शिकायत सरकार से भी की है।
वापस किया प्रीमियम
यूको बैंक छैला के प्रबंधक विजय बौद्ध ने माना कि उनके यहां ही 124 बागवानों का इंश्योरेंस प्रीमियम वापस हुआ है। एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने बागवानों के बीमा आवेदन मंजूर नहीं किए हैं।
अब ये पैसा बागवानों के खातों में वापस डाला जा रहा है। इन बागवानों को बीमा लाभ नहीं मिल पाएगा। बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स का कहना है कि कुछ बागवान उनके पास भी शिकायत लेकर आए थे। इस मामले को देखा जा रहा है।