प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर हैै प्रतिबंध
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में शातिर लोगों को नकली टैग लगाकर कंपोस्टेबल प्लास्टिक बेच रहे हैं। मोहाली से यह नकली टैग वाला सामान शहर में आ रहा है।
टैग देखकर दुकानदार प्लास्टिक से बने चम्मच और प्लेटें मोहाली से मंगवा लेते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि प्लास्टिक पर लगा कंपोस्टेेबल टैग नकली है। हिमाचल में वर्ष 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा है। दुकानदार केवल कंपोस्टेबल प्लास्टिक ही दुकानों में इस्तेमाल कर सकते हैं। लोअर बाजार के एक दुकानदार ने बताया कि उन्होंने चंडीगढ़ से सामान मंगाया था। शिमला में जब उनकी दुकान में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो पता चला की उन्हें नकली टैग वाला सामान भेजा है। धांधली के बाद जब उन्होंने विक्रेता से संपर्क करने की कोशिश की तो थोड़ी देर बाद शातिरों का फोन बंद हो गया।
क्यूआर कोड स्कैन कर खरीदें सामान
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ललित ठाकुर ने बताया कि बोर्ड प्लास्टिक के प्रदूषण नियंत्रण के लिए दुकानों की नियमित जांच करता है। कंपोस्टेबल प्लास्टिक पर क्यूआर कोड होता है जिसे स्कैन करके लोग पता लगा सकते हैं कि प्लास्टिक का निर्माण कहां किया था। लेकिन शातिर दुकानदारों को नकली टैग वाला सामान बेच देते हैं। बोर्ड को मोहाली में शातिरों के ठिकाने का पता चला था लेकिन क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण बोर्ड कोई कार्यवाही नहीं कर पाया।
क्या है कंपोस्टेबल प्लास्टिक
कंपोस्टेबल प्लास्टिक साधारण प्लास्टिक के विपरीत प्राकृतिक रूप से खाद में बदल जाता है। कंपोस्टेबल प्लास्टिक को खाद में बदलने में छह महीने लगते है। सिंगल यूज प्लास्टिक को प्राकृतिक रूप से निवारित होने में 300 साल लगते हैं और इससे जंगलों तथा मिट्टी को अपरिवर्तनीय हानि होती है। एक सिंगल यूज प्लास्टिक के चम्मच की लागत 50 पैसे प्रति चम्मच आती है तो वहीं कंपोस्टेबल प्लास्टिक की कीमत तीन रुपये प्रति चम्मच आती है।