कहते हैं खून की हर बूंद कीमती होती है, लेकिन शिमला का डीडीयू अस्पताल इसकी परवाह नहीं करता। कुछ रोज पहले ही 21 यूनिट खून डस्टबिन में बहाने के बाद एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन ने 31 यूनिट खून बेकार में बहा दिया। 4, 13, 16 और 20 मई को यह खून डस्टबिन में फेंक दिया गया।
फिर से तर्क दिया जा रहा है कि इस खून की मियाद पूरी हो चुकी है। प्रदेश के कई जिलों के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी चल रही है। बावजूद डीडीयू अस्पताल में कीमती खून को ऐसे ही फेंका जा रहा है।
डीडीयू अस्पताल ने एक बार फिर कीमती खून को बहाने का कारनामा किया है। चार से बीस मई तक 31 यूनिट खून डस्टबिन में फेंक दिया गया। फिर से तर्क दिया जा रहा है कि इस खून की मियाद पूरी हो चुकी थी। इससे पहले भी डीडीयू में रक्त बहा देने का मामले सामने आया था। प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया था कि इसकी मियाद पूरी हो चुकी है।
इस बार भी सबक न लेते हुए प्रशासन ने 31 यूनिट रक्त की मियाद पूरी होने का इंतजार किया और बेकार बहा दिया। थोड़ी सतर्कता बरत दी जाती तो मियाद खत्म होने के कुछ दिन पहले दूसरे अस्पताल के मरीजों को यह ब्लड उपलब्ध करवाया जा सकता था। इससे उन रक्तदाताओं का भी मान रह जाता, जिन्होंने किसी रक्तदान शिविर में जरूरतमंद के लिए अपना रक्त दिया था लेकिन प्रशासन के इस तरह के रवैये से रक्तदाता भी शिविरों में रक्तदान करने से पहले सौ बार सोचेगा।
दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में रक्त बर्बाद करने का मामले पहली मर्तबा नही है। साल 2016 में अस्पताल में कई मर्तबा रक्त को फेंका गया है। मार्च से लेकर तीन मई तक अस्पताल में 21 यूनिट खून फेंका गया था। जबकि चार मई से लेकर बीस मई तक कुल 31 यूनिट खून दोबारा फेंका गया है। यह खून किसी दूसरे अस्पताल को भी नही भेजा गया है।
वहीं रिकॉर्ड में दर्शाया गया है कि क्वांटिटी नॉट सफिशेंट होने के चलते कुछ यूनिट खून बहाया गया है। अस्पताल में रोजाना डेढ़ यूनिट खून की खपत होती है, लेकिन इतना खून होने के बावजूद भी इसे किसी अन्य अस्पताल में नही भेजा गया।
राजधानी में महिला व शिशु अस्पताल और आईजीएमसी अस्पताल शामिल है। आंकड़ों के मुताबिक केएनएच अस्पताल में एक माह के अंदर 170 यूनिट और आईजीएमसी अस्पताल में 1250 यूनिट की खपत होती है।
कमेटी कर रही है जांच
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बलदेव ने बताया कि डीडीयू में फेंके गए रक्त मामले पर कमेटी जांच कर रही है। फाइनल रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जब उनसे डीडीयू में 31 यूनिट फिर से बहाए जाने के मामले में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है वहां से जानकारी लेने के बाद ही इस मामले पर कुछ टिप्पणी दे पाऊंगा।
मिलीभगत से दबाया जा रहा मामला
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने प्रेसवार्ता के दौरान स्वास्थ्य महकमे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डीडीयू में रक्त फेंकने मामले को दबाने के लिए स्वास्थ्य महकमे की आपसी मिलीभगत है। उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक में चौदह यूनिट खून को रक्त की कम मात्रा को बताकर नष्ट किया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास जब पत्र उन्होंने भेजा तभी इस मामले पर जांच बैठाई गई है। राज्य में ब्लड बैंक की व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। आरटीआई से मिली सूचना पर यह बात सामने आई है।
यह है नैको की गाइड लाईन
नवंबर 2015 में आई नैको की गाइडलाइन में साफ दर्शाया गया है कि किसी भी ब्लड बैंक में रक्त अधिक है और वह प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है तो उसे तुरंत किसी दूसरे अस्पताल में भेजा जाए।
कुछ आंकड़े यह भी
डीडीयू से केएनएच से ब्लड लेने आए मरीजों के परिजनों को 6.6 यूनिट रक्त, जबकि आईजीएमसी अस्पताल को पचास यूनिट खून एवं प्राइवेट अस्पताल को पांच यूनिट रक्त दिया गया।
उमंग फाउंडेशन का दावा, इस रजिस्ट्रेशन नंबर का ब्लड फेंका
चार मई को फेंके गए ब्लड का रजिस्ट्रेशन नंबर 25641, 25616, 25624, 25636, 25637, 25633 और 25635
तेरह मई को फेंका गया रक्त
रजिस्ट्रेशन नंबर ब्लड ग्रुप
25646 ओ पॉजिटिव
25764 ओ पॉजिटिव
25700 ओ पॉजिटिव
25775 ओ पॉजिटिव
25789 एबी पॉजिटिव
यह है सोलह मई का आंकड़ा
25664 बी नेगेटिव
25649 एबी पॉजिटिव
25679 एबी पॉजिटिव
25689 एबी पॉजिटिव
25677 ओ पॉजिटिव
25682 ओ पॉजिटिव
25683 ओ पॉजिटिव
25687 ओ पॉजिटिव
25696 ओ पॉजिटिव
बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त
25731 एबी नेगेटिव
25737 बी पॉजिटिव
25724 एबी पॉजिटिव
25728 एबी पॉजिटिव
25722 बी पॉजिटिव
25735 बी पॉजिटिव
25716 ओ पॉजिटिव
25707 एबी पॉजिटिव
25699 बी नेगेटिव
25734 बी पॉजिटिव