इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि इसका असर प्रदेश सरकार की नवंबर में प्रस्तावित इनवेस्टर मीट पर भी पड़ सकता है। यह प्रदेश के विकास के लिए सही नहीं होगा।
पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी अपने शासनकाल में औद्योगिक निवेश का प्रयास किया था। इसमें सफल नहीं हुए। अब मौजूदा सरकार निवेश की दिशा में बढ़ रही है तो कांग्रेस को इससे ईर्ष्या पैदा हो गई है और अड़ंगा डालने का प्रयास कर रही है।
ठाकुर ने विपक्ष से कहा कि वह ऐसी धारणा न बनने दें कि हिमाचल में निवेश सुरक्षित नहीं है। धारा 118 में न तो बदलाव की जरूरत है और न ही बदलाव करना चाहिए।
उन्होंने अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल और ओवैसी के संसद में यह मुद्दा उठाए जाने पर कहा कि इन दोनों ही नेताओं को धारा 118 और 35ए को आपस में नहीं जोड़ना चाहिए था।
ये दोनों धाराएं बिलकुल अलग हैं। बाहरी राज्यों के लोग हिमाचल में कृषक नहीं बन सकते, लेकिन अनुमति लेकर मकान के लिए जमीन खरीद सकते हैं। अनुच्छेद 370 को कई लोगों ने दिल से स्वीकार किया है।