बेटा, मैं सीनियर सिटीजन हूं। बीमार हूं। अस्पताल से आ रहा हूं। खड़े होकर सफर नहीं कर सकता। रिजर्व सीट दिलवा दो।
मंगलवार दोपहर बाद करीब 2:30 बजे ओल्ड बस स्टैंड से कसुम्पटी जा रही निजी बस में खड़े बुजुर्ग ने कंडक्टर से कुछ इसी तरह आग्रह किया।
कंडक्टर ने जवाब दिया, ‘सीटों पर स्टीकर लगा दिए हैं। सीट दिलाना हमारा काम नहीं। ‘खड़े नहीं हो सकते तो खुद सीट मांगों’।
बुजुर्ग ने फिर कहा, ‘अरे, सीट दिलाना तो ड्राइवर-कंडक्टर की जिम्मेदारी है, तुम सीट खाली कराओ’ यह सुनते ही कंडक्टर ने आपा खो दिया और बुजुर्ग से दुर्व्यवहार पर उतर आया।
बैम्लोई के पास कंडक्टर और बुजुर्ग के बीच तीखी तकरार हुई। कंडक्टर का कहना था कि रिजर्व सीटें फुल हैं। सभी सवारियों ने किराया दिया है। अब पुरुष सवारी को सीट से कैसे उठाऊं?
कंडक्टर के दुर्व्यवहार से क्षुब्ध बस में सवार एक अन्य यात्री ने बस के मालिक को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। बस के मालिक के निर्देश के बाद बुजुर्ग यात्री को सीट उपलब्ध करवाई गई।
ये हैं परिवहन विभाग के निर्देश
परिवहन विभाग के निदेशक रितेश चौहान के अनुसार लोकल रूटों पर बसों में बाईं ओर की सभी सीटें विशेष श्रेणी यात्रियों (महिलाएं, बुजुर्ग, अपंग और कैंसर पीड़ित) के लिए आरक्षित हैं। रिजर्व सीटें पात्र लोगों को उपलब्ध करवाना ड्राइवर-कंडक्टर की जिम्मेदारी है।
ड्राइवर-कंडक्टर यदि सीटें दिलाने में आनाकानी करते हैं तो उनकी शिकायत परिवहन विभाग या पुलिस से की जा सकती है। मनमानी करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा।