प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में भोरंज के जिस तोहू गांव के किसानों की उन्नत सोच का देश भर में डंका बजाया है, वह गांव आज भी सिंचाई सुविधा से महरूम हैं। यहां के किसान खेतीबाड़ी के लिए 12 महीने मौसम पर ही निर्भर हैं।
गांव की मिट्टी भी कुछ खास नहीं है। खेत बंजर जैसे लग रहे हैं। मिट्टी कम और पत्थर ज्यादा हैं। आजादी के बाद से गांव सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। गांव तक एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती।
बच्चे-बूढ़ों और बीमार लोगों को डेढ़ किलोमीटर तक पालकी में उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। पीएम मोदी ने यहां के किसानों की सराहना की लेकिन, इसमें लोगों की मेहनत के अलावा सरकारों का कोई योगदान नहीं दिखता।
हमीरपुर और बिलासपुर जिला की सीमा से सटे इस गांव में मृदा संरक्षण कार्यक्रम के तहत करीब छह साल पहले तीन चेक डैम बनाए गए थे, जिनका लाभ आज तक नहीं मिल पाया है।
चैकडैम हुआ क्षतिग्रस्त
तीन चेकडैम में से एक पिछली बरसात में क्षतिग्रस्त हो चुका है जबकि दो पानी से लबालब हैं। गांव से नीचे होने के कारण यहां से पानी को सिंचाई के इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका है। पानी को लिफ्ट करने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है।
मन की बात कार्यक्रम के बाद सोमवार को गांव पहुंची कृषि विभाग की टीम ने आश्वासन दिए हैं, लेकिन पूरे कब होंगे यह पता नहीं। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि तोहू गांव में मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने के बाद फसलों की पैदावार में वृद्धि हुई है।
पथरीली जमीन में पहले गेहूं की प्रति एकड़ 4.1 क्विंटल पैदावार थी, जो बीते वर्ष 7.12 क्विंटल प्रति एकड़ पहुंची है। गांव में सिंचाई सुविधा न होने की सूचना मिली है। शीघ्र किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
उपायुक्त हमीरपुर संदीप कदम ने कहा कि तोहू गांव की रिपोर्ट कृषि विभाग से मंगवाई है। किसानों की समस्या के समाधान के लिए कृषि विभाग को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
किसान ज्ञान चंद(65) ने कहा कि प्रदेश सरकार को इस गांव की सुध लेनी चाहिए। कृषि विभाग ने बीते वर्ष किसानों को 20 किलो गेहूं का बीज सब्सिडी पर दिया था, लेकिन सिंचाई सुविधा के बिना बीज किसी काम का नहीं।
क्या कहते हैं किसान
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से पैदावार बढ़ी : प्रधान
भौंखर पंचायत के प्रधान कैप्टन रणजीत सिंह ने कहा कि सिंचाई सुविधा नहीं है। गांव में सड़क भी नहीं है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने से कृषि पैदावार बढ़ी है, लेकिन उतनी नहीं जितनी बढ़नी चाहिए।
कर रहे जैविक खाद का इस्तेमाल : शर्मा
भागीरथ शर्मा ने कहा कि वह कृषि विभाग के बनाए गए समूह के सदस्य हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को मिले हैं। इसमें जैविक खाद के बारे में भी जानकारी है। बीज भी पिछले वर्ष मिला था, लेकिन सिंचाई सुविधा का अभाव होने से परेशानी होती है।
पैदावार कम, हम मौसम पर निर्भर : मस्तराम
ग्राम सुधार सभा के प्रधान सूबेदार मेजर मस्त राम शर्मा ने कहा कि कृषि विभाग 4 गुना कृषि पैदावार बढ़ने की बातें कर रहा है, लेकिन धरातल पर महज 15 से 20 फीसदी ही पैदावार बढ़ी है। वो भी मौसम पर निर्भर है। गांव में न तो सिंचाई सुविधा है और न सड़क सुविधा। छह साल पहले बने चेकडैम का कोई प्रयोग नहीं हो रहा।
किसान सोहन लाल ने कहा कि वह पिछले 50 सालों से खेतीबाड़ी कर रहे हैं, लेकिन किसानों को सिंचाई सुविधा न होने का मलाल है। बारिश होने पर कई बार फसल अच्छी हो जाती है और कई बार सूखे की वजह से नुकसान झेलना पड़ता है।