चौदहवीं विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति के सभापति विधायक संजय रत्न की अध्यक्षता में हुई बैठकों में मामले की परत-दर-परत पड़ताल की गई। समिति ने निर्माण की गुणवत्ता, अधिकारियों की भूमिका और सरकारी धन के इस्तेमाल पर विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा। बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना के तहत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए तैयार भवन वर्ष 2018 में पूरा हुआ था। 22 नवंबर 2018 को इसे कॉलेज को सौंपा गया। लेकिन अप्रैल 2019 से भवन में गंभीर दरारें आने लगीं और बाद में इसके झुकाव की स्थिति सामने आई।
आईआईटी मंडी समेत तकनीकी एजेंसियों की जांच में भवन के कई महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल सदस्य मानकों पर खरे नहीं उतरे। सुरक्षा कारणों से भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया। समिति ने सवाल उठाया कि जब तकनीकी जांच में निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन पर गंभीर सवाल सामने आ गए थे तो दोषियों के खिलाफ समय रहते विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विजिलेंस ब्यूरो की एफआईआर और अभियोजन स्वीकृति के मामले में हिमुडा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के फैसले पर भी समिति ने नाराजगी जताई।
समिति ने स्पष्ट किया कि सामूहिक निर्णय व्यक्तिगत जवाबदेही से बचने का आधार नहीं हो सकता। निर्माण में कोताही के मामले में ठेकेदार की करीब 22 लाख रुपये की शेष राशि जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सात लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट और 15 लाख रुपये का अंतिम भुगतान शामिल है। ठेकेदार को दो साल के लिए सरकारी विभागों में ब्लैकलिस्ट करने को भी कहा गया है। अब नए छात्रावास के लिए कॉलेज के नजदीक 30 दिन में जमीन चिह्नित करनी होगी। इसके बाद 15 दिन में जियो-टेक्निकल जांच पूरी करनी होगी। करीब 1587 वर्ग मीटर में बनने वाले नए भवन को सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
उधर, नगर नियोजन और आवास मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि विधानसभा सचिवालय की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है। इसका अध्ययन किया जा रहा है। स्थानीय निधि लेखा समिति के निर्देशों पर काम किया जाएगा। जिम्मेवार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित भी होगी।