बैटरी चोरों को पकड़ने में पुलिस के छूटे पसीने, 7 दिन में 17 बसों से बैटरियां चोरी
बिना बैटरियों के बेकार खड़ी हैं बसें, लोग परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बैटरी चोर अब शिमला पुलिस को खुला चैलेंज देने पर उतर आए हैं। पुलिस के दावों के बावजूद शहर से एचआरटीसी बसों की बैटरियां चोरी होने का सिलसिला नहीं थम रहा। रविवार रात पांच घंटे के भीतर चोरों ने टुटीकंडी बाईपास पर पार्क एचआरटीसी बस की बैटरियां उड़ा दीं। सात दिन के भीतर चोर 17 बसों से 34 बैटरियां चोरी कर चुके हैं। बिना बैटरियों के एचआरटीसी बसें धूल फांक रही हैं और दो दर्जन रूट प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बैटरी चोरों ने जहां एचआरटीसी अधिकारियों के नाम में दम कर रखा है वहीं आए दिन हो रही चोरियों से शिमला पुलिस की साख पर भी बट्टा लग रहा है। चंडीगढ़ से रात 9:55 बजे रवाना हुई एचआरटीसी की चंडीगढ़-शिमला बस रात करीब डेढ़ बजे आईएसबीटी पहुंची। सवारियां उतारने के बाद चालक ने पौने दो बजे बस एचआरटीसी डीजल पंप और जल शक्ति भवन के बीच खुले मोड़ पर खड़ी कर दी। इसके बाद चालक रेस्ट रूम में सोने चला गया। सुबह पौने सात बजे चालक जब बस के पास पहुंचा तो बैटरियां गायब थीं। चालक ने इसकी सूचना अड्डा इंचार्ज और अधिकारियों को दी जिसके बाद बालूगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। शुक्रवार को भी दो बसों की बैटरियां चोरी हुई थीं जिसके बाद एसपी ने चोरों को पकड़ने के लिए गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी फुटेज जांचने का दावा किया था। बावजूद इसके दो दिन बाद ही चोरों ने एक और बस की बैटरियों पर हाथ साफ कर दिया है।
एचआरटीसी तारादेवी डिपो की यह तीसरी बस है जिसकी बैटरियां चोरी हुई हैं। लोकल डिपो की एक दर्जन से अधिक बसें खड़ी हो गई हैं। निगम प्रबंधन को रूट संचालित करने के लिए बसों की किल्लत झेलनी पड़ रही है। एचआरटीसी के मंडलीय प्रबंधक पवन शर्मा ने बताया कि बैटरियां चोरी होने से बसों का संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है। निगम को लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। पुलिस में एफआईआर दर्ज करने के बावजूद चोर पकड़ से दूर हैं। एचआरटीसी ने अपने स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई है।
4 लाख रुपये से अधिक है
चोरी हुई बैटरियों की कीमत
गिरोह में कुछ मैकेनिक भी शामिल
बैटरियों नहीं खोल सकता आम व्यक्ति
शिमला। एचआरटीसी की 17 बसों से चोरी हुई 34 बैटरियों की कीमत 4 लाख रुपये से अधिक है। बाजार में बसों की बैटरी 11 से 12 हजार रुपये की मिलती है। बस में बैटरी फिट करने का खर्चा इसके अतिरिक्त होता है। खास बात यह भी है कि बैटरी चोर गिरोह के टारगेट पर ऑन रूट बसें हैं। पार्किंग में अधिक दिनों से खड़ी बसों की बैटरियां चोरी नहीं हो रहीं। रूटों पर चल रही बसों की नई बैटरियां चोरों के निशाने पर हैं। बाकायदा रैकी करने के बाद बसों से बैटरियां चोरी की जा रही हैं। बैटरी चोर गिरोह में मैकेनिकों के भी शामिल होने का अंदेशा है। बसों से बैटरियां खोलना आसान नहीं होता। तेजाब से भरी बैटरी को खोलते हुए शार्ट सर्किट होने पर आग लग सकती है और धमाका हो सकता है। बैटरी का वजन 40 से 50 किलो होता है ऐसे में बैटरियां चोरी करने में किसी बड़े गिरोह का हाथ होने की संभावना है।
तेज की तफ्तीश, जल्द आएंगे परिणाम : कमल
डीएसपी हेडक्वार्टर कमल वर्मा ने बताया कि एचआरटीसी बसों की बैटरियां चोरी होने के मामले बढ़ रहे हैं। चोरों को पकड़ने के लिए तफ्तीश तेज की गई है। जल्द ही सार्थक परिणाम सामने होंगे।