ढाई लाख रुपये रखा एक चित्र का मूल्य
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी में आध्यात्मिक चित्र लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसमें दिल्ली के चित्रकार सजल पात्रा के बनाए दो चित्र प्रदर्शित किए हैं। इसमें तुरीय अवस्था को दर्शाया है। एक चित्र का मूल्य ढाई लाख रुपये रखा है।
सजल पात्रा ने बताया कि तुरीय अनुभव की एक अवस्था है, जिसमें मन और मस्तिष्क में कुछ भी नहीं चलता है। बताया कि इस चित्र के माध्यम से उन्होंने व्यक्ति को मेडिटेशन के बाद दिखने वाली दुनिया को दिखाने का प्रयास किया है। एक चित्र में ध्यान में बैठा व्यक्ति दिखाया है वहीं दूसरे चित्र में पहाड़ों के बीच दो व्यक्तियों को आध्यात्मिक रूप से दिखाया है। चित्रकार ने बताया कि वह 32 सालों से आध्यात्मिक विषय पर चित्रकारी करते आ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने सोलह साल जून-जुलाई के महीनों में पहाड़ाें का भ्रमण किया है। चित्रकारी करने के विभिन्न विकल्प भी खोजे। मेडिटेशन करने से मानसिक रूप से शांति महसूस होती है और दिमाग में ऊर्जा और पॉजिटिविटी महसूस होती है। माहसू आर्ट सोसायटी और हिमाचल पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में इसे सात दिन में तैयार किया है। सोसायटी के संस्थापक डॉ. भादर सिंह ने बताया कि चित्रकला प्रदर्शनी में भारत और नेपाल के 29 कलाकारों के बनाए सौ से अधिक चित्र प्रदर्शित किए हैं। इनका मूल्य दो हजार से चार लाख रुपये तक रखा है। इसमें प्राकृतिक सौंदर्य, पोर्टरेट, जानवार, पक्षी, ग्रामीण जीवन, पहाड़, ऐतिहासिक इमारतों के चित्र शामिल हैं।