ऊहल प्रोजेक्ट में इसी माह से शुरू होगा विद्युत उत्पादन
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महत्वाकांक्षी ऊहल तृतीय विद्युत परियोजना में 21 साल के लंबे इंतजार के बाद इसी माह में विद्युत उत्पादन शुरू होगा। साल 2003 में विद्युत उत्पादन की नींव रखी गई थी और अब करीब 21 साल बाद 100 मेगावाट विद्युत उत्पादन शुरू होने जा रहा है। अनुमानित 431 करोड़ रुपये की प्रस्तावित विद्युत परियोजना में विद्युत उत्पादन शुरू करने के लिए करीब 2600 करोड़ रुपये का बजट खर्च हो चुका है। इसमें एक हजार करोड़ से अधिक की धनराशि परियोजना के निर्माण के लिए लिए गए ऋण में शामिल है।
पहले 2007 में विद्युत उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था। खुद्दर स्थित 1.76 लाख क्यूबिक मीटर वाली रेजर वायर का निर्माण भी तय अवधि पर हुआ था, लेकिन करीब 11 किलोमीटर टनल के निर्माण को लेकर ब्यास वैली कार्पोरेशन प्रबंधन को पेश आई दिक्कतों के चलते परियोजना को शुरू करने में समय अधिक लग गया। यही नहीं साल 2020 में जब विद्युत उत्पादन शुरू करना चाहा तो परियोजना की पैन स्टॉक फट जाने से विद्युत उत्पादन की उम्मीदें भी टूट गई थी। इस दौरान एक हजार करोड़ से अधिक का नुकसान परियोजना प्रबंधन को उठाना पड़ा। हालांकि चूल्हा स्थित पावर हाउस का निर्माण साल 2012 में पूरा हो गया था।
अब ऊहल परियोजना के पावर हाउस में 33.3 मेगावाट की तीन यूनिटों में मैकेनिकल स्पीनिंग का कार्य पूरा हो गया। अब मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल टेस्ट शुरू हो गए हैं।दिसंबर 2024 में मैकेनिकल स्पीनिंग शुरू हुई थी। 22, 25 व 29 दिसंबर को मैकेनिकल स्पीनिंग का परीक्षण शुरू हुआ है। तीनों ही यूनिटों की टरबाइन भी पानी के प्रेशर से सफलतापूर्वक घूम चुकी है। ऐसे में अब इसी माह में विद्युत उत्पादन की राह प्रशस्त हो गई है। उधर, ऊहल परियोजना इलेकिट्रल अधीक्षण अभियंता रमन चौधरी ने बताया कि इसी माह में एक यूनिट में विद्युत उत्पादन हर हाल में शुरू किया जाएगा। पानी की आवक बढ़ी तो दूसरी यूनिट भी शुरू कर दी जाएगी।
सात रुपये प्रति यूनिट विद्युत की आपूर्ति से 100 मेगावाट क्षमता वाली ऊहल परियोजना सरकार का खजाना भरेगी। ऊहल परियोजना की तीनों टरबाइनों में मैकेनिकल स्पीनिंग का कार्य सफल रहा है। जनवरी माह में विद्युत उत्पादन शुरू होगा।
-देवेंद्र सिंह, प्रबंध निदेशक, ब्यास वैली कॉरपोरेशन