फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: विवि 50 करोड़ जुटाने के लिए बढ़ा सकता है फीस

विज्ञापन
विज्ञापन
अनुदान न बढ़ने से खर्चे पूरा करना मुश्किल
विज्ञापन

मोबलाइजेशन कमेटी में लिए फैसले लागू कर सकता है विवि
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। आर्थिक संकट के दौर से बाहर निकलने के लिए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला अब अपने स्तर पर आय के संसाधनों को बढ़ा सकता है। विवि का लक्ष्य करीब 50 करोड़ तक आय बढ़ाना है ताकि वह अपने सारे खर्चे पूरा कर सके। ऐसे में विवि प्रशासन फीस में दस फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है।

हालांकि दस जनवरी 2025 को हिमाचल प्रदेश विवि के कुलपति की अध्यक्षता में हुई विवि की रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी की बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद लिए फैसलों को लेकर भी विवि स्तर पर बनी कमेटियां और सब कमेटियां आय के संसाधन जुटाने पर माथा पच्ची कर रही हैं। इस बैठक में आय बढ़ाने को लेकर कई फैसले लिए गए थे जिन्हें अभी तक लागू नहीं किया है। विवि प्रशासन अब छात्रावास के शुल्क, बस किराये, प्रोफेशनल कोर्स और परीक्षा, ऑनलाइन दी जा रही सेवाओं की फीस में वृद्धि कर आय बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है।
विज्ञापन


प्रदेश सरकार ने इस बार भी वार्षिक सहायता अनुदान को 152.20 करोड़ ही रखा है। कुलपति प्रो. एसपी बंसल की अध्यक्षता में हुई बैठक में 50 करोड़ तक की सालाना आय बढ़ाने के फैसलों को भी विवि लागू कर सकता है। फीस में दस फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र वर्मा ने माना कि इस मसले पर बैठक फिर बुलाई जाएगी। इसमें अलग-अलग मदों के लिए बनी सब कमेटियों की आय बढ़ाने पर की जाने वाली अनुशंसा को ध्यान में रखकर कार्य योजना तैयार की जाएगी।
विज्ञापन


आय बढ़ाने के लिए यह लिए हैं फैसले
विवि की रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी की वीसी की अध्यक्षता में दस जनवरी को हुई बैठक में आय बढ़ाने और खर्च कम करने को लेकर कई अहम फैसले लिए थे। इसमें प्रिंटिंग का खर्च बचाने को अपनी प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करने, डे स्कॉलर को दी जा रही परिवहन सुविधा में छात्रों को किराये में दी जाने वाली छूट कम करने, सेवाओं को आउटसोर्स करने, स्थायी संपत्ति से आय अर्जित करने की बात कही थी। इसके अलावा दूरवर्ती शिक्षण संस्थान सीडीओई के नोयडा सेंटर को एनटीए को किराये पर देकर सालाना दो करोड़ कमाने, छात्रों को दी जाने वाली ऑनलाइन सेवाओं की एवज में न्यूनतम फीस चार्ज करने, नई दुकानें किराये पर देने, नए वित्तपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने, एमबीए, कंप्यूटर, लॉ, योग, संगीत विभाग में आवश्यकता आधारित अल्पकालिक और दीर्घावधि कोर्स शुरू करने, रोजगारोन्मुख कोर्स शुरू कर आय बढ़ाने के फैसले लिए थे। लेकिन यह फैसले लागू नहीं हुए हैैं, अब विवि इन फैसलों को लागू कर सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें