जाठिया देवी में टाउनशिप मामले में लोगों ने बैठक कर हिमुडा के सीईओ के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति
बोले-आठ गांवों में कूहलों और योजनाओं से हो रही सिंचाई
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमुडा के सीईओ और सचिव सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ की ओर से आठ गांवों की भूमि को कम उपजाऊ बताए जाने के बयान पर जाठिया देवी भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति ने बैठक कर कड़ा विरोध जताया है। गौरतलब है कि जाठिया देवी में टाउनशिप परियोजना (नया शहर बसाने के लिए) के लिए सरकार आठ गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने जा रही है जिसका लोग विरोध कर रहे हैं।
समिति का कहना है कि यह बयान पूरी तरह जमीनी हकीकत से परे है और किसानों को भ्रमित करने का प्रयास है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उपजाऊ कृषि भूमि को कम उपजाऊ बताकर अधिग्रहण को जायज ठहराने की कोशिश की जा रही है। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण संघर्ष समिति के प्रधान देसराज ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन आठ गांवों की भूमि पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहां सिंचाई की पर्याप्त और मजबूत व्यवस्था मौजूद है। क्षेत्र में वर्षों से पारंपरिक कूहलें संचालित हो रही हैं, जो खेती के लिए पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं। इसके अलावा सिंचाई के लिए दो लिफ्ट योजनाएं भी कार्यरत हैं। इससे किसानों को साल भर खेती करने में सुविधा मिलती है।
देसराज ने बताया कि इन गांवों में किसान सब्जियां और नकदी फसलों के अलावा गेहूं और मक्की की खेती करते हैं। 90 प्रतिशत लोगों का जीवन यापन खेती से हो रहा है। खेती यहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है और अधिकांश परिवार पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में भूमि को कम उपजाऊ बताना न केवल तथ्यों के विपरीत है, बल्कि किसानों की मेहनत और अस्तित्व को भी नजरअंदाज करने जैसा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि यह भूमि अधिग्रहित की जाती है, तो सैकड़ों किसान परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। यह जमीन केवल खेती का साधन नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक संरचना का आधार भी है। समिति ने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों की भावनाओं और जमीनी सच्चाई को समझे बिना निर्णय लेने की दिशा में बढ़ रहा है।
उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण मंजूर नहीं
समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी हालत में उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी नहीं देगी। किसानों की सहमति के बिना कोई भी कदम उठाया गया तो उसका विरोध किया जाएगा। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों की अनदेखी करते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन को और तेज और व्यापक किया जाएगा। आने वाले समय में जनसभाएं, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध दर्ज कराया जाएगा।