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Shimla News: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा- मेयर का कार्यकाल बढ़ाने पर स्थिति स्पष्ट करे प्रदेश सरकार

Wed, 25 Feb 2026 10:16 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

शिमला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम के महापौर के कार्यकाल को लेकर प्रदेश सरकार से दो मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। 
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम के महापौर के कार्यकाल को लेकर प्रदेश सरकार से दो मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा, सरकार का जवाब नहीं आया तो मामले में अंतरिम आदेश पारित होगा। उधर महाधिवक्ता ने कहा कि कार्यकाल को बढ़ाने संबंधित कानून सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी को भेजा है।
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शिमला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। अब मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई 2 मार्च को करेगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि मेयर की नियुक्ति को तत्काल रद्द कर दिया जाए।
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सरकार ने मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से 5 वर्ष बढ़ाने को लेकर जो ऑर्डिनेंस राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था, उसकी समय सीमा 6 जनवरी को खत्म हो गई है। अध्यादेश खत्म होने के बाद मेयर पद पर बने नहीं रह सकते हैं। मेयर का ढाई साल का कार्यकाल 14 नवंबर को खत्म हो गया है, उसके बाद रोस्टर के अनुसार महिला को यह सीट आरक्षित थी। ऐसे में मेयर अपने पद पर नहीं बने रह सकते और नगर निगम को तय रोस्टर के मुताबिक चुनाव करवाने होंगे।
 

उन्होंने अदालत को बताया कि किस कानून और अथॉरिटी के तहत मेयर नगर निगम में प्रशासनिक कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि नगर निगम के मेयर को तत्काल काम से रोक दिया जाए। उधर सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कार्यकाल को बढ़ाने संबंधित कानून को विधानसभा ने 18 फरवरी को पारित कर दिया है। सरकार ने बिल में आपत्तियों को दुरुस्त करने के बाद राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया है। गौरतलब है कि शुरू में कांग्रेस पार्षदों ने भी मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का विरोध किया था। 

नगर निगम का बजट पेश करने का भाजपा पार्षदों ने किया था विरोध
राजधानी में पांच दिन पहले नगर निगम ने बचत भवन में बजट पेश किया था लेकिन इस सदन में बजट से ठीक पहले जमकर नारेबाजी हुई थी। भाजपा पार्षद सरोज ठाकुर, आशा शर्मा, कमलेश मेहता, कल्याण धीमान, कुसुम ठाकुर, रचना झिन्ना, निशा ठाकुर, बिट्टू कुमार और मीना चौहान ने महापौर सुरेंद्र चौहान से पूछा था कि सदन में मेयर-डिप्टी मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने वाली अधिसूचना दिखाई जाए। भाजपा ने मेयर से कहा कि सरकार का विधेयक खारिज हो चुका है। इसके अलावा जो विधेयक विधानसभा में पेश किया गया उसे भी राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में नियमानुसार महापौर और उप महापौर का पद खाली है। लिहाजा महापौर असंवैधानिक तौर पर बजट पेश कर रहे हैं। हालांकि महापौर ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है।
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सदन में इस पर सवाल उठाना ठीक नहीं। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने हंगामा कर नारेबाजी शुरू कर दी लेकिन जब भाजपा पार्षद नहीं माने तो महापौर ने एकाएक बजट पढ़ना शुरू कर दिया। इसके भाजपा के सभी पार्षद  नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर गए।

34 में से 24 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद
नगर निगम के कुल 34 वार्ड हैं। इनमें 24 वार्डों में कांग्रेस समर्थित पार्षद सीधे तौर पर जीत कर आए हैं। भाजपा के 9 और एक माकपा समर्थित पार्षद जीतकर सदन में पहुंचा है। प्रदेश सरकार ने 5 मनोनीत पार्षद भी बनाए हैं। हालांकि इस पूरे सदन में 21 महिलाएं भी जीतकर आई हैं। इसलिए महिलाओं के लिए महापौर का पद मांगा जा रहा था। 
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