पत्नी इस शर्त पर वापस आने के लिए तैयार हुई कि पति के साथ अलग रहेगी। इसके बाद वह तीन महीने तक पति के साथ रही। इसके बाद फिर चली गई। परिवार के मनाने के बाद वह लगभग एक महीने के लिए वापस आई, लेकिन फिर हमेशा के लिए चली गई। इस दौरान पति को कारोबार में भारी नुकसान हुआ। बीच में उसका दादी की मृत्यु हुई। कुछ समय बाद भाई की शादी भी हुई। इन स्थितियों में पत्नी ने सहयोग करने के बजाए ससुराल के लिए समस्याएं पैदा करना शुरू कर दिया।
पत्नी के बुरे व्यवहार से तंग आकर ससुराल पक्ष ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। बदले में पत्नी ने दहेज प्रताड़ना की झूठी एफआईआर दर्ज कराई। घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया और भी शिकायतें पुलिस में दी। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी यानी याचिकाकर्ता की पत्नी ने आरोप लगाया है कि पति और उसका परिवार उसके साथ बुरा व्यवहार करता था। आश्चर्यजनक रूप से पत्नी का यह भी दावा है कि वह पति के साथ रहना चाहती है। इसलिए पत्नी की दलीलें एक विरोधाभास है।
अदालत को लगता है कि याचिकाकर्ता ने यह साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश किए हैं कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की है। पति ने यह भी रिकॉर्ड पर साबित किया है कि उसने अपनी शादी के बाद अलग रहने की जगह का भी इंतजाम किया था। इन बातों से यह भी साबित होता है कि पत्नी का कभी भी पति के साथ रहने का इरादा नहीं था।