हिमाचल के कुल्लू जिले की सैंज खड्ड किनारे बसी बस्तियों में रह रहे ग्रामीणों में खौफ का माहौल है। खड्ड का जलस्तर बढ़ते ही यहां माहौल तनावपूर्ण हो जाता है। घाटी के लोग 2004 में बाढ़ के दिए जख्मों को अभी भूले नहीं हैं।
इस बाढ़ ने पूरे सिउंड बाजार को नक्शे से ही गायब कर दिया था और सैंज बाजार में भी भारी नुकसान होने से लोग आज भी बाढ़ के नाम से खौफ खाते हैं। 15 वर्ष पहले जीवानाला में बादल फटने से मची तबाही का मंजर लोगों को अब भी याद है।
हालांकि, अब सैंज खड्ड पर बिजली परियोजनाओं के दो डैम बने हैं और पानी का बहाव टनल के भीतर मोड़ा गया है। बावजूद इसके बरसात में डैम से पानी छोड़ने पर लोग सिहर उठते हैं। निहारनी डैम के आगे किली-री-परेशी की पहाड़ी दरकने से बाढ़ का खतरा अब भी बरकरार है।
हाल ही में हुई भारी बारिश के दौरान निहारनी बांध से पानी छोड़ा गया तो इस पहाड़ी से भूस्खलन होना शुरू हो गया। संभावित खतरे को देख न्यूली गांव के लोगों ने अपना समान समेटना शुरू कर दिया। लोगों को डर है कि अगर यह पहाड़ी खिसकी तो खड्ड का बहाव रोक देगी।