अर्की के एक ट्रक मालिक की याचिका खारिज रुचि सांख्यान शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने आग लगने से पूरी तरह जलकर खाक हुए ट्रक का बीमा क्लेम खारिज करने के बीमा कंपनी के फैसले को सही ठहराया है। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि घटना के समय व्यावसायिक वाहन का वैध रूट परमिट न होना मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 और बीमा पॉलिसी की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने ट्रक मालिक की शिकायत में कोई आधार न पाते हुए उसे खारिज कर दिया। अर्की निवासी चंद्र शेखर ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उनका ट्रक जेपी हिमाचल सीमेंट, बाघा के साथ सीमेंट और क्लिंकर ढुलाई के काम में लगा हुआ था। यह ट्रक 5.50 लाख रुपये में बीमा कंपनी के पास बीमित था। 21 मई 2018 को ट्रक नालागढ़ स्थित प्लांट के पास खड़ा था। इस दौरान नजदीकी जंगल में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से शिकायतकर्ता का ट्रक पूरी तरह जल गया। इस घटना की एफआईआर भी दर्ज करवाई थी।इसके बाद ट्रक मालिक ने बीमा कंपनी से वाहन की बीमित राशि 5.50 लाख रुपये, मासिक कमाई के नुकसान के एवज में 24 लाख रुपये तथा मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाने की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने दलील दी कि उनका नेशनल परमिट ट्रक में ही आग लगने के कारण जल गया था और घटना के समय ट्रक खड़ा था। इसलिए उस समय परमिट की आवश्यकता नहीं थी। वहीं बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने आरटीए सोलन की जांच रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि वाहन का पुराना परमिट 23 नवंबर 2015 को समाप्त हो चुका था। इसके बाद नया परमिट घटना के बाद 23 अगस्त 2018 को रिन्यू कराया था। यानी 21 मई 2018 को घटना वाले दिन वाहन के पास कोई वैध परमिट मौजूद नहीं था। आयोग ने आदेश में कहा कि परमिट जलने से संबंधित कोई भी पुलिस शिकायत या डीडीआर रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया था। आयोग ने कहा कि यह एक व्यावसायिक परिवहन वाहन था और केवल घटनास्थल पर खड़े रहने से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 के तहत वैध परमिट की आवश्यकता समाप्त नहीं हो जाती। ऐसे में वैध परमिट न होने के आधार पर बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करना उचित था और कंपनी की सेवा में कोई कमी नहीं पाई गई।