सात घंटे के लंबे इंतजार के बाद तीमारदार ने किलाड़ अस्पताल की एंबुलेंस चालक को फोन कर एंबुलेंस मुहैया करवाने की बात कही। चालक ने चिकित्सा अधिकारी को सारी कहानी बताई। चिकित्सा अधिकारी को चालक को अस्पताल की एंबुलेंस लेकर मरीज लाने भेजा।
इसके बाद कहीं जाकर मरीज को सात घंटे बाद दोपहर करीब एक बजे एंबुुलेंस सेवा उपलब्ध हो पाई। तब जाकर कहीं एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को किलाड़ अस्पताल पहुंचाया गया।
यहां पर मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद मरीज को भर्ती कर लिया गया। गनीमत रही कि एंबुलेंस के इंतजार में मरीज की जान बच गई। मगर इस मामले ने जिले के दुर्गम क्षेत्र में एंबुलेंस सेवा की दुर्दशा को उजागर करके रख दिया है।
चिकित्सा अधिकारी किलाड़ अस्पताल डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि शौर गांव में एंबुलेंस का इंतजार कर रहे मरीज को अस्पताल की एंबुलेंस से किलाड़ पहुंचाया गया। उसकी हालत अब पहले से बेहतर है।